पूर्व पटवारी कमलेश राजपूत के परिवार में 4 सरकारी अधिकारी, ED की कार्रवाई के बाद संपत्तियों की जांच तेज होने के संकेत

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में CGPSC मामले से जुड़े पूर्व पटवारी कमलेश सिंह राजपूत के घर मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दबिश दी। कार्रवाई के बाद उनके परिवार के सदस्यों की सरकारी नौकरियों और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी सामने आई है। कमलेश राजपूत करीब 15 साल तक छत्तीसगढ़ पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष रहे हैं।
कमलेश राजपूत के चारों बच्चे सरकारी सेवाओं में हैं। बड़ी और दूसरी बेटी पटवारी हैं, जबकि तीसरी बेटी उप पंजीयक के पद पर हैं। उनका बेटा योगेश सिंह राजपूत नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत है। ED की जांच में परिवार की संपत्तियों और आय के स्रोतों को भी खंगाले जाने की संभावना है।
बेटा नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत
कमलेश राजपूत के बेटे योगेश सिंह राजपूत ने वर्ष 2021-22 में CGPSC भर्ती परीक्षा दी थी। चयन के बाद उन्हें नायब तहसीलदार बनाया गया। वर्तमान में उनकी पदस्थापना दुर्ग जिले के धमधा में बताई गई है।
CGPSC भर्ती में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े आर्थिक लेनदेन की जांच पहले से चल रही है। ऐसे में परिवार के सदस्यों की सरकारी नियुक्तियों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
बेटी लंबे समय से उरला क्षेत्र में पटवारी
कमलेश राजपूत की बेटी निवेदिता राजपूत करीब 11 वर्षों से उरला क्षेत्र में पटवारी के पद पर पदस्थ बताई जा रही हैं। बीच में उनका तबादला दूसरे क्षेत्र में हुआ था, लेकिन कुछ समय बाद वे दोबारा उरला लौट आईं।
उरला दुर्ग का प्रमुख औद्योगिक और तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है। यहां जमीनों के लेआउट और बड़े प्रोजेक्ट होने के कारण पटवारी के स्तर पर नामांतरण, सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य होते हैं।
पिता और बेटी की पदस्थापना भी जांच के दायरे में
नौकरी के दौरान कमलेश राजपूत उरला से लगे करहीडीह क्षेत्र में पटवारी रह चुके हैं। बाद में उनकी बेटी निवेदिता की पदस्थापना उरला क्षेत्र में हुई। दोनों क्षेत्रों में जमीन और निर्माण से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट हैं।
ED की कार्रवाई के बाद इन इलाकों में परिवार के नाम पर मौजूद जमीनों और अन्य संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। जमीन खरीद की तारीख, कीमत और आय के स्रोतों का मिलान भी किया जा सकता है।
रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए
कमलेश सिंह राजपूत लंबे समय तक पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष रहे हैं। प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहने के दौरान राजस्व विभाग में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली।
अब जांच में उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ परिवार की संपत्तियों और आर्थिक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड भी अहम माने जा रहे हैं।
जमीन और आर्थिक रिकॉर्ड की जांच पर नजर
ED की तलाशी के बाद परिवार की घोषित आय और संपत्तियों के बीच तालमेल की जांच की जा सकती है। जमीनों की खरीद, फार्महाउस, लेआउट से जुड़े निवेश, रजिस्ट्री दस्तावेज और बैंक लेनदेन जैसे रिकॉर्ड जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
खास तौर पर उन क्षेत्रों की संपत्तियों पर ध्यान दिया जा सकता है, जहां कमलेश राजपूत या उनके परिवार के सदस्य लंबे समय तक राजस्व विभाग से जुड़े पदों पर रहे हैं।










