Gurbax Singh: हॉकी दिग्गज गुरबख्श सिंह का निधन, भाई के साथ ओलंपिक में बनाया था खास रिकॉर्ड

Gurbax Singh: हॉकी दिग्गज गुरबख्श सिंह का निधन, भाई के साथ ओलंपिक में बनाया था खास रिकॉर्ड

देशभर में मची IPL की धूम के बीच खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर आई है. ओलंपिक में भारतीय हॉकी की सफलता में योगदान देने वाले एक दिग्गज का निधन हो गया है. भारतीय हॉकी के सफल दौर का हिस्सा रहे पूर्व खिलाड़ी गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का निधन हो गया. शुक्रवार 24 अप्रैल को ग्रेवाल ने 84 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. उनका निधन मोहाली के पास जीरकपुर में दिल का दौरा पड़ने से हुई.

ग्रेवाल उस दौर में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे, जब ये दुनिया की सबसे मजबूत और सफल टीमों में से एक थी. इसी दौरान 1968 के मैक्सिको सिटी ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था और ग्रेवाल मेडल जीतने वाली उस भारतीय टीम के अहम सदस्य थे. उनकी ये उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि उनके साथ उस टीम में उनके ही भाई भी थे. उनके निधन पर हॉकी इंडिया समेत हॉकी प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है.

दो भाइयों का अनोखा रिकॉर्ड

गुरबख्श सिंह और उनके भाई बलबीर सिंह के नाम खेल जगत में एक बहुत ही खास उपलब्धि दर्ज है. मेक्सिको सिटी ओलंपिक गेम्स में गुरबख्श और उनके भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल ने एक साथ मिलकर भारतीय हॉकी टीम की ओर से मैदान में कदम रखा था और देश को एक मेडल दिलाने में बड़ा योगदान दिया था. भारतीय हॉकी के इतिहास में यह उन चुनिंदा मौकों में से एक था, जब सगे भाइयों की जोड़ी एक साथ ओलंपिक में उतरी थी.

देश को दिए नए हॉकी खिलाड़ी

सिर्फ हॉकी का मैदान ही गुरबख्श सिंह के कौशल का गवाह नहीं बना बल्कि हॉकी स्टिक से अपनी चमक बिखेरने के बाद भी वो इससे जुड़े रहे और नई प्रतिभाएं देश के लिए तैयार की. वो लंबे समय तक वेस्टर्न रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी के रूप में तैनात थे. यही वो वक्त था जब गुरबख्श ने राजस्थान सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले युवाओं को रेलवे की हॉकी टीम से जोड़ा. इससे कई खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने में मदद मिली, जबकि रेलवे भी एक टीम के रूप में मजबूत हुई.

रिटायरमेंट के बाद मुंबई हॉकी में एक्टिव

कहते हैं कि एक फौजी और एक खिलाड़ी कभी-भी पूरी तरह रिटायर नहीं होते. वो उसके बाद भी अपने क्षेत्र से जुड़े रहते हैं. गुरबख्श भी इससे जुदा नहीं थे. मुंबई में रिटायरमेंट के बाद भी वह खेल के प्रति समर्पित रहे. उन्होंने मुंबई हॉकी एसोसिएशन में ऑनररी सेक्रेटरी के रूप की जिम्मेदारी निभाई और इस दौरान एसोसिएशन के लिए कई अहम काम किए. यही कारण है कि भारतीय हॉकी में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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