OCI कार्ड रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने ब्रिटेन में रहने वाली लेखिका और पत्रकार अमृत विल्सन का ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड रद्द किए जाने के मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि देश को इतना सहनशील नहीं होना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि खराब होने दी जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अमृत विल्सन के खिलाफ इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों के आधार पर उनका OCI कार्ड रद्द किया गया था। सरकार ने इस संबंध में कारणों का विवरण अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपा।
अमृत विल्सन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस स्पष्ट और विस्तृत नहीं था। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त जानकारी दिए OCI कार्ड रद्द करना मनमाना और गैरकानूनी है। याचिका में यह भी कहा गया कि एक पत्रकार और लेखक के रूप में सरकारी नीतियों पर टिप्पणी करना उनके अधिकारों के दायरे में आता है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि OCI कार्ड रद्द होने के कारण अमृत विल्सन लंबे समय से भारत नहीं आ सकीं, जिससे उनके शोध कार्य और पेशेवर गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। उन्होंने अदालत से अपने OCI कार्ड को रद्द करने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त में निर्धारित करते हुए केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले में राष्ट्रीय हित और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन पर विचार किया जाएगा।









