रिश्ते की खुशहाली के लिए खतरनाक है चुप्पी, जानिए कैसे निकलेगा समस्या का हल

आध्यात्म में मौन को काफी शक्तिशाली माना गया है। सही समय पर इसका इस्तेमाल किया जाए, तो यह खूब प्रभावी भी है। लेकिन रिश्ते के लिए बात-बात पर मौन की चादर ओढ़ लेना ठीक नहीं। कई लोगों की यह आदत होती है कि जब उन्हें कोई बात अच्छी नहीं लगती, तो समाने वाले से स्पष्ट रूप से उसके बारे में बात करने की जगह वे मौन धारण कर लेते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे साइलेंट ट्रीटमेंट या मौन उपचार कहा जाता है। यह रिश्तों पर गहरा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसमें व्यक्ति सामने वाले के प्रति मौखिक नाराजगी व्यक्त करने की जगह उससे संवाद करना बंद कर देता है। यदि आपको लगता है कि यह तरीका सामने वाले को सुधारने या अपनी गलती का अहसास कराने के लिए कारगर है, तो यह जान लें कि आपकी यह आदत रिश्ते को बेहतर बनाने की बजाय उसे बिगाड़ सकती है।
क्या है यह पहेली
सीनियर साइकोलोजिस्ट डॉ. निशा खन्ना बताती हैं, ‘साइलेंट ट्रीटमेंट या मौन उपचार किसी भी व्यक्ति का एक तरह का मनोवैज्ञानिक व्यवहार है। इसमें कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ किसी समस्या या मुद्दे को सुलझाने की बजाय, उससे बातचीत करना बंद कर सकता है। साइलेंट ट्रीटमेंट पति-पत्नी, परिवार के दो सदस्यों या फिर बॉस-कर्मचारी के बीच भी देखा जा सकता है। इसमें व्यक्तिगत शिकायत के कारण व्यक्ति सामने वाले से सीधे उसके प्रश्नों का जवाब देने से इंकार करने से लेकर बातचीत को पूरी तरह बंद भी कर देता है।
क्याें करते हैं लोग ऐसा
कुछ व्यक्ति टकराव या सामने वाले की असहज कर देने वाली भावनाओं से बचने के लिए रक्षा कवच के रूप में चुप रहने लगते हैं।
रिश्ते पर अपना नियंत्रण रखने के लिए भी लोग ऐसा करते हैं। कुछ लोग अपनी बात मनवाने के लिए मौन को हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं और दबाव बनाते हैं।
कभी-कभी किसी व्यक्ति से सामने वाले को बहुत अधिक कष्ट पहुंच जाता है। सामने वाला खुद को सही मानकर लगातार गलत व्यवहार करता है। ऐसे में अपने आक्रोश को दबाने के लिए भी कुछ लोग बातचीत बंद कर देते हैं।
कुछ व्यक्तियों में अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने के लिए स्किल की कमी होती है। ऐसी स्थिति में वे मौन का सहारा लेते हैं।
चुप्पी का असर
आत्मसम्मान को चोट: अनदेखा किए जाने से अस्वीकृत होने की भावना पैदा हो सकती है। यह सामने वाले के आत्मसम्मान को नुकसान पहुंचा सकती है।
तनाव का बढ़ना: कोई व्यक्ति हमारी बात का जवाब क्यों नहीं दे रहा है, यह नहीं जान पाने की अनिश्चितता तनाव और घबराहट पैदा कर सकती है।
अकेलापन और अलगाव: बातचीत की कमी सामने वाले को कटा हुआ और अलग-थलग महसूस करा सकती है। यह अकेलापन और अलगाव की भावना को बढ़ा देता है।
अपराधबोध और आत्मदोष: जो लोग आपकी इस चुप्पी को झेलने के लिए बाध्य हैं, वे अपनी कार्यशैली पर सवाल उठाने लगते हैं और इस स्थिति के लिए खुद को दोषी मानने लगते हैं।
विश्वास में कमी: किसी भी रिश्ते का आधार आपसी विश्वास होता है। लंबे समय तक बातचीत बंद रहने से रिश्ते में ऐसी दरार पड़ जाती है, जिसे भर पाना मुश्किल हो जाता है। चुप रहने से दुश्मनी और अनिश्चितता का माहौल बनता है।
ऐसे निकलेगा समस्या का हल
1 कारण समझने की कोशिश करें: डॉ. निशा खन्ना के अनुसार, प्रतिक्रिया देने से पहले चुप रहने के पीछे छिपे के कारण को समझने की कोशिश करें। क्या व्यक्ति आहत, क्रोधित या किसी बात को लेकर परेशान है? दृष्टिकोण को समझने से सामने वाले की स्थिति को संतुलित रूप में देखने में मदद मिल सकती है।
2 शांत और संयमित रहें : चुप रहना निराशाजनक और दुखदायी हो सकता है। क्रोध या आक्रामकता के साथ प्रतिक्रिया देने से स्थिति और बिगड़ सकती है। इसकी बजाय अपना संयम बनाए रखें और चुप रहकर जवाबी कार्रवाई करने की इच्छा का विरोध करें।
3 बातचीत के लिए रास्ता खुला रखें: जिस व्यक्ति से आपको कष्ट पहुंचा है, उससे बातचीत पूरी तरह से बंद करने की जगह कुछ दिनों तक चुप रहकर उस व्यक्ति से धीरे-धीरे बातचीत करना शुरू करें। इससे पहले उसके सामने बात करने की अपनी इच्छा व्यक्त करें। बातचीत इस उदाहरण की तरह की जा सकती है: क्या आप परेशान हैं? मैं जानना और समझना चाहती हूं कि आपकी परेशानी का कारण क्या है? यदि आप चाहें, तो आपकी समस्या के समाधान में आपकी मदद कर सकती हूं।
4 अपनी सीमा जरूर बताएं : यदि आप चुप रहने का उपयोग किसी की गलती में सुधार लाने के लिए कर रही हैं, तो अपनी एक सीमा निर्धारित करें और सामने वाले को अपनी हद या सीमा के बारे में बताएं। व्यक्ति को बताएं कि आप बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन आप कभी-भी किसी तरह का भावनात्मक शोषण बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।
5 अपने इस स्वभाव पर विचार करें: यह जरूर सोचें कि क्या आप कभी-कभार किसी से बातचीत बंद करती हैं या अकसर ऐसा ही करती हैं? यदि आप इसे बार-बार आजमाती हैं, तो यह किसी भी व्यक्ति के साथ आपके रिश्ते को खराब कर सकता है। यह उपाय आपके व्यक्तित्व को भी हल्का बना सकता है।
6 शुरू करें खुद की देखभाल: अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता दें। ऐसी चीजें करें, जो आपको खुश और शांत करे। परिवार के सदस्यों या दोस्तों से खुलकर बातचीत करें। अपनी भावनाओं को एक कागज पर लिखें। लिखने से आप तनावमुक्त होंगी और आपकी यह खराब आदत भी आपसे दूर चली जाएगी।











