TDS Refund: ज्यादा कट गया है TDS तो न हों परेशान, घर बैठे वापस मिलेगा पाई-पाई पैसा; जानें ITR फाइल करने और रिफंड क्लेम करने का पूरा प्रोसेस

कई बार देखा जाता है कि सही समय पर आईटीआर फाइल करने के बाद भी लोगों का रिफंड खाते में नहीं पहुंचता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रिफंड फेल होने के पीछे मुख्य रूप से पांच बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी वजहें होती हैं

Tds refund।नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों से लेकर बैंक एफडी (FD) और अन्य स्रोतों से कमाई करने वाले आम नागरिकों के लिए एक बेहद जरूरी और काम की खबर है। अगर किसी वित्त वर्ष में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड या किसी अन्य आमदनी पर जरूरत से ज्यादा टीडीएस (TDS – Tax Deducted at Source) कट गया है, तो आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है।

सरकार द्वारा काटा गया यह अतिरिक्त पैसा आपको पूरी तरह वापस मिल सकता है। इस डूबे हुए पैसे को वापस पाने के लिए नागरिकों को केवल समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना होता है। आईटीआर प्रोसेस होने के बाद आयकर विभाग यह रिफंड राशि सीधे आपके प्रमाणित बैंक खाते में ट्रांसफर कर देता है।

​दरअसल, सरकार टैक्स की चोरी रोकने और समय पर राजस्व वसूलने के लिए सीधे कमाई के सोर्स से ही टीडीएस के रूप में टैक्स काट लेती है। लेकिन टैक्स रिफंड की स्थिति तब बनती है, जब किसी वित्त वर्ष में काटा गया कुल टीडीएस आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि आपकी कुल सालाना आमदनी आयकर की बेसिक एग्जेम्शन लिमिट (कर छूट सीमा) से कम है और आपकी कोई टैक्स देनदारी बनती ही नहीं है, फिर भी यदि बैंक या कंपनी ने आपका टीडीएस काट लिया है, तो आप आईटीआर दाखिल कर इस पूरे पैसे को वापस पा सकते हैं।

यह टीडीएस सैलरी, डिविडेंड, प्रोफेशनल फीस, कंसल्टेंसी चार्ज, कमीशन, ब्रोकरेज, लॉटरी और ऑनलाइन गेमिंग जैसी विभिन्न श्रेणियों की आमदनी पर काटा जाता है।

इन 5 गलतियों के कारण अटक सकता है आपका रिफंड।tds refund 

कई बार देखा जाता है कि सही समय पर आईटीआर फाइल करने के बाद भी लोगों का रिफंड खाते में नहीं पहुंचता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रिफंड फेल होने के पीछे मुख्य रूप से पांच बड़ी प्रशासनिक और तकनीकी वजहें होती हैं:

  • ​स्थायी खाता संख्या (PAN) का आधार (Aadhaar) कार्ड से लिंक न होना।
  • ​आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक खाते का प्री-वैलिडेट (Pre-validated) न होना।
  • ​बैंक खाते में दर्ज आपकी व्यक्तिगत डिटेल का पैन (PAN) रिकॉर्ड से मेल न खाना।
  • ​आईटीआर फॉर्म में बैंक का आईएफएससी (IFSC) कोड गलत दर्ज होना।
  • ​करदाता द्वारा रिटर्न में दिया गया बैंक खाता वर्तमान में बंद हो जाना।

​इन समस्याओं और रिफंड के फंसने से बचने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आईटीआर दाखिल करने से पहले अपने पैन को आधार से अनिवार्य रूप से लिंक कर लें और बैंक खाते की अद्यतन जानकारी को पोर्टल पर वैलिडेट कर लें।

रिफंड क्लेम करने और स्टेटस जांचने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका।tds refund 

टैक्स रिफंड क्लेम करने का सबसे पहला कदम ‘फॉर्म 26AS’ (Form 26AS) की जांच करना है। यह फॉर्म आयकर पोर्टल पर आपके पैन से लिंक होता है, जिसमें आपके सभी स्रोतों से काटे गए टीडीएस, एडवांस टैक्स और सेल्फ असेसमेंट टैक्स का पूरा लेखा-जोखा होता है।

दूसरा कदम है अपनी सभी श्रेणियों की सही आमदनी दर्शाते हुए आईटीआर फाइल करना और टीडीएस का मिलान फॉर्म 26AS से करना, जिसके बाद सिस्टम स्वचालित रूप से आपके रिफंड की गणना कर देता है।

इसके बाद तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कदम है आधार ओटीपी (OTP) के जरिए अपने दाखिल रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) पूरा करना। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही रिफंड की प्रोसेसिंग शुरू होती है।

​एक बार ई-वेरिफिकेशन सफलतापूर्वक पूरा हो जाने के बाद, आमतौर पर 4 से 5 हफ्तों के भीतर रिफंड का पैसा सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है। यदि आप अपने रिफंड का ऑनलाइन स्टेटस चेक करना चाहते हैं, तो सबसे पहले इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।

इसके बाद ‘ई-फाइल’ (e-File) सेक्शन में जाकर ‘इनकम टैक्स रिटर्न’ पर क्लिक करें। यहाँ आपको ‘View Filed Returns’ का विकल्प चुनना होगा, जिसके बाद असेसमेंट ईयर (AY 2026-27) का चयन कर ‘View Details’ पर क्लिक करते ही आपके स्क्रीन पर रिफंड की पूरी प्रोसेसिंग हिस्ट्री और वर्तमान स्थिति साफ दिखाई देने लगेगी।

NewsDesk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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