पाकिस्तान में हमास कमांडर की मौजूदगी पर सवाल, लश्कर से जुड़े कार्यक्रम में दिखे नजी जहीर

पाकिस्तान के गुजरांवाला में आयोजित एक कार्यक्रम में हमास के सीनियर कमांडर नजी जहीर की मौजूदगी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग ने किया था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संगठन माना जाता है। नजी जहीर का बतौर मुख्य अतिथि मंच पर आना पाकिस्तान में चरमपंथी संगठनों के बीच संबंधों को उजागर करता है।
नजी जहीर, जिन्हें हमास के पूर्व प्रमुख खालिद मशाल का करीबी प्रतिनिधि माना जाता है, इन दिनों पाकिस्तान दौरे पर हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्हें पारंपरिक केफीयेह पहने हुए भाषण देते देखा गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा को संयुक्त राष्ट्र और इससे जुड़े राजनीतिक संगठन को अमेरिका द्वारा आतंकी घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों का होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के मुताबिक, नजी जहीर ने इस दौरे के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर राशिद अली संधु से भी मुलाकात की। कार्यक्रम में दोनों एक ही मंच पर नजर आए और मौजूद लोगों ने नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में यह साफ दिखता है कि यह आयोजन खुले तौर पर लश्कर से जुड़े मंच के तहत हुआ, जो क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे का संकेत माना जा रहा है।
नजी जहीर पहले भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का दौरा कर चुके हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने पीओके में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों के साथ भारत विरोधी रैली को संबोधित किया था। यह दौरा पहलगाम आतंकी हमले से कुछ ही हफ्ते पहले हुआ था, जिससे उनकी गतिविधियों को और गंभीरता से देखा जा रहा है।
हमास कमांडर के पाकिस्तान से रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। अक्टूबर 2023 में इजराइल पर हमास के हमले के बाद नजी जहीर पाकिस्तान पहुंचे थे, जहां उन्होंने कई धार्मिक और राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद क्वेटा, कराची और इस्लामाबाद में आयोजित सम्मेलनों में उनकी भागीदारी सामने आई। यहां तक कि उन्हें कानूनी संस्थाओं और बार एसोसिएशन के मंचों पर भी सम्मानित किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नजी जहीर की लगातार और सार्वजनिक गतिविधियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमास और पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठनों के बीच वैचारिक और रणनीतिक नजदीकियां बढ़ रही हैं। यह स्थिति न केवल भारत, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।











