हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए 28,840 करोड़ की नई योजना मंजूर

केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना को 2035-36 तक लागू किया जाएगा और इसके लिए कुल 28,840 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार इस योजना के तहत देशभर में हवाई यात्रा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने पर जोर दे रही है।

नई योजना के तहत अनुपयोगी हवाई पट्टियों का विकास कर 100 नए हवाई अड्डे बनाए जाएंगे। इसके लिए अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। साथ ही 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिन पर करीब 3,661 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

एयरलाइन कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपये का वित्तीय समर्थन भी देगी, जिससे क्षेत्रीय रूट्स पर उड़ानों को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाया जा सके। इसके अलावा ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए भी बजटीय सहायता दी जाएगी, जिसमें प्रति हवाई अड्डा और हेलीपैड के लिए निश्चित सीमा तय की गई है।

योजना में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देते हुए घरेलू स्तर पर निर्मित विमानों की खरीद का भी प्रावधान किया गया है। इसके तहत छोटे विमानों और हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिससे क्षेत्रीय उड़ानों की उपलब्धता बढ़ेगी।

सरकार का मानना है कि इस योजना से टियर-2 और टियर-3 शहरों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी। यह पहल देश के विमानन क्षेत्र को मजबूत करने और व्यापक विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि 2016 में शुरू की गई उड़ान योजना के तहत अब तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को जोड़ा जा चुका है और लाखों उड़ानों के जरिए करोड़ों यात्री इसका लाभ उठा चुके हैं।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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