TMC के 20 बागी सांसदों पर फैसला लटकने से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- 3 महीने की देरी चिंता का विषय

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की. अदालत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में अब तक लिए गए 3 महीने की देरी को चिंता का विषय बताया. दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसले की मांग की गई है.
जस्टिस बागची ने कहा कि लंबित अयोग्यता कार्यवाही के संभावित परिणामों को देखते हुए देरी महत्वपूर्ण थी. उन्होंने कहा कि देरी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन याचिकाओं पर होने वाले फैसले के दूसरे मामलों और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि कुछ महीने की देरी भी रेड फ्लैग हो सकती है.
उन्होंने कहा, ‘आपकी याचिका में बताया गया है कि तीन महीने बीत चुके हैं. आपने इसे पूरा क्यों नहीं किया, जबकि इसमें कुछ ही समय लगना चाहिए और इसका असर दूसरे मामलों के साथ-साथ देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है?’.
अभिषेक बनर्जी के वकील ने क्या कहा?
वहीं, अभिषेक बनर्जी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पीठ को सूचित किया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 5 अगस्त को सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए 14 दिन का समय दिया था. हालांकि सांसदों द्वारा अतिरिक्त समय का अनुरोध करने पर यह समय सीमा 22 सितंबर तक बढ़ा दी गई थी और अब आगे भी ये समय सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही है.
सॉलिसिटर जनरल ने न्यायिक समयसीमा तय करने का किया विरोध
इस मामले में स्पीकर का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायिक समयसीमा तय करने का विरोध करते हुए जोर दिया कि सांसदों को जवाब देने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘अदालत किसी भी समयसीमा पर विचार नहीं कर सकती. स्पीकर से अपेक्षा की जाती है कि उन्हें पता हो कि क्या किया जाना चाहिए. सभी को मौका दिया जाना चाहिए’.
मामले की सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टली
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका को अभी लंबित रखा जाएगा, ताकि कार्यवाही की प्रगति पर नजर रखी जा सके. बागी सांसदों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया गया है और मामले की सुनवाई 6 हफ्ते के लिए टाल दी गई है.
ये भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, ममता बोलीं- जल्द होगी INDIA गठबंधन की बैठक











