इनकम टैक्स बचाने के 10 रास्ते, जिन्हें जल्दी कोई नहीं बताता

टैक्सपेयर्स अक्सर इनकम टैक्स बचाने के लिए सिर्फ वही पुराने और मशहूर रास्ते अपनाते हैं, जैसे सेक्शन 80C (बचत और निवेश) या 80D (हेल्थ इंश्योरेंस), लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके अलावा भी कई ऐसे नियम हैं, जिनका फायदा उठाकर आप अपना टैक्स काफी कम कर सकते हैं? दुर्भाग्य से, जानकारी के अभाव या जटिलता की वजह से ये डिडक्शन अक्सर छूट जाती हैं।

इसलिए, इस साल इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरने से पहले थोड़ा समय निकालकर इन कम चर्चित, मगर महत्वपूर्ण टैक्स सेक्शनों पर एक नजर डाल लें। थोड़ी सी जागरूकता आपका टैक्स बोझ हल्का कर सकती है। आपको टैक्स बचाने के लिए फोर्विस मजार्स इन इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर भरत धवन 10 टिप्स दे रहे हैं। बता दें ये सभी रास्ते ओल्ड टैक्स रिजीम वालों के लिए है।

1. किराया देते हैं, पर HRA नहीं मिलता? (सेक्शन 80GG)

ज्यादातर सैलरी पाने वालों को HRA (हाउस रेंट अलाउंस) मिलता है, लेकिन अगर आप प्रोफेशनल हैं या कोई ऐसा काम करते हैं, जहां HRA नहीं मिलता, और आप किराया देते हैं, तो सेक्शन 80GG आपके काम आ सकता है। इसके तहत आपको किराए पर मिलने वाली छूट हर महीने ₹5,000 तक या आपकी कुल सालाना आमदनी का 25% (जो भी कम हो) हो सकती है। बस एक शर्त है, आपके काम करने की जगह पर आपका खुद का कोई घर नहीं होना चाहिए।

2. गंभीर बीमारी के इलाज पर खर्च? (सेक्शन 80DDB)

अगर आपने या आपके आश्रित (जैसे माता-पिता, पति/पत्नी, बच्चे) ने कैंसर, पर्किंसंस, गुर्दे की गंभीर बीमारी जैसे रोगों का इलाज करवाया है, तो इस छूट का लाभ लें। आम लोगों के लिए यह छूट ₹40,000 तक और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1,00,000 तक मिल सकती है। इसके लिए आपको बीमारी के इलाज के लिए किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर की लिखी हुई पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) रखनी होगी।

3. दिव्यांग आश्रित की देखभाल का खर्च? (सेक्शन 80DD)

अगर आपका कोई आश्रित (जैसे बच्चा, भाई-बहन, माता-पिता) दिव्यांग है और आप उसकी देखभाल, इलाज, ट्रेनिंग या उसके नाम की लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं, तो इस सेक्शन के तहत आपको छूट मिल सकती है। सामान्य दिव्यांगता (40% से 80%) के लिए यह छूट ₹75,000 और गंभीर दिव्यांगता (80% या ज्यादा) के लिए ₹1.25 लाख सालाना तक है।

4. खुद हैं दिव्यांग? (सेक्शन 80U)

अगर आप खुद दिव्यांग हैं, तो सेक्शन 80U सीधे आपको टैक्स में छूट देता है, चाहे आपने खर्चा किया हो या नहीं। सामान्य दिव्यांगता पर ₹75,000 और गंभीर दिव्यांगता पर ₹1.25 लाख की सीधी छूट मिलती है। बस आपको किसी अधिकृत मेडिकल अथॉरिटी से दिव्यांगता प्रमाणपत्र (डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) लेना होगा।

ध्यान दें, 80DD और 80U में फर्क है। 80DD परिवार के दिव्यांग सदस्य की देखभाल करने वाले को मिलती है, जबकि 80U खुद दिव्यांग व्यक्ति को मिलती है।

5. पढ़ाई के लिए लोन लिया है? (सेक्शन 80E)

अगर आपने या आपके माता-पिता ने आपकी (या बच्चे की) हायर एजुकेशन (ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन) के लिए एजुकेशन लोन लिया है, तो इस पर चुकाए गए ब्याज की पूरी रकम पर टैक्स छूट मिलती है। यह छूट लोन चुकाने तक या अधिकतम 8 साल तक (जो पहले हो) मिल सकती है। यहां कोई अधिकतम सीमा नहीं है और पढ़ाई भारत में हो या विदेश में, दोनों पर लागू होता है।

6. पहली बार खरीदा घर? (सेक्शन 80EE)

अगर आपने पहली बार अपना घर खरीदा है और वह खरीद 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच हुई थी, तो आप एक खास छूट पा सकते हैं। शर्त यह है कि घर की कीमत ₹50 लाख से ज्यादा न हो और लोन की मंजूरी ₹35 लाख से ज्यादा न मिली हो। ऐसे में, होम लोन पर चुकाए गए ब्याज में से अतिरिक्त ₹50,000 सालाना की छूट मिलती है। यह छूट सेक्शन 24(b) के तहत मिलने वाली ब्याज छूट के ऊपर और मिलती है।

7. सस्ते घर के लिए लोन लिया? (सेक्शन 80EEA)

बजट 2019 में यह नया सेक्शन आया। अगर आपने ‘सस्ते घर’ (अफोर्डेबल हाउसिंग) खरीदने के लिए लोन लिया है तो आप लोन के ब्याज पर अतिरिक्त ₹1.5 लाख तक की छूट पा सकते हैं। शर्त यह है कि घर की रजिस्ट्री वैल्यू (स्टैम्प ड्यूटी वैल्यू) ₹45 लाख से ज्यादा न हो और लोन 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच मंजूर हुआ हो। साथ ही, अगर आप सेक्शन 80EE का फायदा ले रहे हैं तो आप इसका फायदा नहीं ले सकते।

8. बैंक से मिली ब्याज आमदनी? (वरिष्ठ नागरिकों के लिए – सेक्शन 80TTB)

60 साल से ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को बैंक डिपॉजिट (FD, RD) या बचत खाते (Savings Account) से मिलने वाली ब्याज आमदनी पर ₹50,000 तक की छूट मिलती है। अक्सर लोग FD के ब्याज पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सेविंग्स अकाउंट के ब्याज को भूल जाते हैं।

9. नौकरी में मिलने वाले छोटे-मोटे भत्ते? (सेक्शन 10(14) और नियम 2BB)

कई कर्मचारियों को कुछ खास भत्ते मिलते हैं जो पूरी तरह या आंशिक रूप से टैक्स-फ्री होते हैं। जैसे, दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाला ट्रांसपोर्ट भत्ता, बच्चों की पढ़ाई का भत्ता (₹100/महीना प्रति बच्चा), या हॉस्टल फीस का भत्ता (₹300/महीना प्रति बच्चा)। ये छोटी-छोटी छूटें भी जोड़कर अच्छी बचत करा सकती हैं।

10. घर के लोन पर ब्याज? (सेक्शन 24(b))

यह सेक्शन काफी जाना-माना है, फिर भी कई बार 80C के साथ घुलमिल जाता है। अगर आपने खुद रहने के लिए घर खरीदा है और उस पर लोन लिया है, तो लोन के ब्याज पर ₹2 लाख सालाना तक की छूट मिलती है। यह छूट आपको तब भी मिल सकती है जब आप सेक्शन 80C के तहत लोन की मूल रकम (प्रिंसिपल अमाउंट) पर छूट नहीं ले रहे हों। बस शर्त यह है कि लोन घर खरीदने या बनवाने के लिए लिया गया हो और घर का निर्माण लोन लेने के 5 साल के अंदर पूरा हो गया हो।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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