ganesh chaturthi- कहीं सोने का कलश, कहीं 133 साल से जल रहा दीपक! गणेश चतुर्थी से पहले जानें गणपति के 8 दिव्य ‘अष्टविनायक’ मंदिरों का रहस्य
गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अष्टविनायक मंदिरों के दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है। ये मंदिर कहां स्थिति हैं और इनके नाम क्या-क्या हैं इसके बारे में आज हम आपको जानकारी देंगे।

ganesh chaturthi-दिल्ली: साल 2025 में गणेश चतुर्थी का महापर्व 27 अगस्त से आरंभ हो रहा है। यह 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समय होता है, जब गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा देश गूंज उठता है।
ganesh chaturthi/भक्त अपने घरों में गणपति की स्थापना करते हैं, लेकिन इस दौरान कुछ ऐसे दिव्य स्थान हैं, जहाँ बप्पा के दर्शन का महत्व सर्वोपरि माना गया है।
ganesh chaturthi/ये स्थान हैं महाराष्ट्र में स्थित भगवान गणेश के 8 स्वयंभू और चमत्कारी मंदिर, जिन्हें संयुक्त रूप से ‘अष्टविनायक’ कहा जाता है। मान्यता है कि इन मंदिरों की यात्रा करने से हर मनोकामना पूरी होती है।
ganesh chaturthi/आइए, इस गणेशोत्सव से पहले करते हैं इन आठ दिव्य मंदिरों की मानसिक यात्रा।
1. श्री मयूरेश्वर, मोरगांव: जहां मोर पर सवार हुए थे गणपति
यह अष्टविनायक यात्रा का पहला पड़ाव है। मोरगांव में स्थित यह मंदिर काले पत्थर से बना है और इसका आकार मोर जैसा है। पौराणिक कथा के अनुसार, यहीं पर भगवान गणेश ने सिंधुरासुर नामक राक्षस का संहार करने के लिए मोर पर सवार होकर ‘मयूरेश्वर’ अवतार लिया था।
2. श्री सिद्धिविनायक, सिद्धटेक: जहां विष्णु ने की थी गणपति पूजा
अहमदनगर के सिद्धटेक में स्थित यह मंदिर सिद्धि और सफलता का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान विष्णु ने मधु-कैटभ नामक राक्षसों से युद्ध करने से पहले गणेश जी की स्थापना कर उनकी पूजा की थी, जिसके बाद उन्हें विजय प्राप्त हुई।
3. श्री बल्लालेश्वर, पाली: भक्त के नाम पर प्रसिद्ध हुए भगवान
रायगढ़ के पाली गांव में स्थित यह मंदिर गणपति के अपने भक्त ‘बल्लाल’ के प्रति प्रेम का प्रतीक है। कथा है कि भगवान ने यहां अपने परम भक्त बल्लाल को दर्शन दिए और उसी के नाम पर यहां वास करने का वरदान दिया।
4. श्री वरदविनायक, महड: जहां 1892 से जल रहा है अखंड दीपक
रायगढ़ के महड में स्थित यह मंदिर अपनी अखंड ज्योति के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इस मंदिर में एक दीपक 1892 से लगातार जल रहा है। मंदिर में स्थापित मूर्ति पास की ही एक झील से प्राप्त हुई थी। यह मंदिर वरदान देने वाले गणपति के रूप में पूजा जाता है।
5. श्री चिंतामणि, थेऊर: जब गणपति ने लौटाई चिंता हरने वाली मणि
पुणे के थेऊर में स्थित इस मंदिर की कथा कपिल मुनि से जुड़ी है। जब एक राजा ने मुनि से उनकी चिंतामणि छीन ली, तब भगवान गणेश ने उसका वध कर मणि वापस दिलाई। तभी से गणपति यहां ‘चिंतामणि’ के रूप में भक्तों के सारे दुःख और चिंताएं हरते हैं।
6. श्री गिरिजात्मज, लेण्याद्री: गुफा में विराजे हैं पार्वती के पुत्र
यह मंदिर एक बौद्ध गुफा के अंदर बना है और यहां तक पहुंचने के लिए 307 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ‘गिरिजा’ यानी माता पार्वती और ‘आत्मज’ यानी पुत्र। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता पार्वती ने गणेश को पुत्र रूप में पाने के लिए तपस्या की थी।
7. श्री विघ्नेश्वर, ओझर: जहां लगा है सोने का कलश
यह अष्टविनायक मंदिरों में एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसके शिखर पर सोने का कलश और गुंबद है। पुणे के ओझर में स्थित यह मंदिर विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है, जो भक्तों के जीवन से सभी बाधाओं को दूर करते हैं।
8. श्री महागणपति, रजनगांव: गणपति का सबसे शक्तिशाली स्वरूप
यह मंदिर गणपति के उस शक्तिशाली स्वरूप को समर्पित है, जिसमें उनके 10 सूंड और 20 हाथ हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने से पहले यहीं पर ‘महागणपति’ की पूजा की थी।
ये आठों मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कारों की जीती-जागती कहानियां हैं, जो हर साल लाखों भक्तों को अपनी ओर खींचती हैं।ganesh chaturthi










