भारत ने ग्रीन एनर्जी उत्पादन में रचा इतिहास, 2025 में 44.5 गीगावॉट नई क्षमता जुड़ी

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए साल 2025 ऐतिहासिक साबित हुआ है। कैलेंडर ईयर 2025 के 11 महीनों में ही देश ने ग्रीन एनर्जी उत्पादन में नया रिकॉर्ड बना लिया है। इस अवधि में कुल 44.5 गीगावॉट (GW) नई ग्रीन एनर्जी क्षमता ग्रिड से जुड़ी है, जिसमें बड़ी हाइड्रो परियोजनाएं भी शामिल हैं।

रिन्यूएबल एनर्जी की इस तेज रफ्तार ग्रोथ में सोलर पावर का सबसे बड़ा योगदान रहा है। 2025 के पहले 11 महीनों में सोलर सेक्टर से करीब 35 गीगावॉट नई क्षमता जोड़ी गई, जो पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है। साल 2024 में यह आंकड़ा करीब 25 गीगावॉट था।

बड़ी हाइड्रो परियोजनाओं को छोड़ दें तो नवंबर 2025 तक देश की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 204 गीगावॉट तक पहुंच गई है। यह 31 दिसंबर 2023 के 134 गीगावॉट के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी है। सिर्फ 11 महीनों में रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में 26 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो पूरे 2024 में हुई 21 फीसदी ग्रोथ से ज्यादा है।

राज्यों की बात करें तो सोलर पावर क्षमता में राजस्थान सबसे आगे है, जहां कुल क्षमता 36 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है। इसके बाद गुजरात 25 गीगावॉट, महाराष्ट्र 17 गीगावॉट और तमिलनाडु 12 गीगावॉट के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। 2025 में जोड़ी गई सोलर क्षमता में करीब 26 गीगावॉट ग्राउंड-माउंटेड सोलर से, 7 गीगावॉट रूफटॉप सोलर से, लगभग 1 गीगावॉट हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स से और शेष ऑफ-ग्रिड सोलर से आई है।

विंड पावर सेक्टर में भी 2025 के दौरान मजबूती देखने को मिली है। जनवरी से नवंबर के बीच इस सेक्टर में करीब 6 गीगावॉट नई क्षमता जोड़ी गई, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक है। इससे साफ है कि विंड एनर्जी सेक्टर ने सुस्ती के दौर के बाद फिर से रफ्तार पकड़ ली है।

नवंबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 254 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है। इसमें सोलर से 133 गीगावॉट, विंड से 54 गीगावॉट, बायोएनर्जी से 11 गीगावॉट, स्मॉल हाइड्रो से 5 गीगावॉट और लार्ज हाइड्रो से 50 गीगावॉट क्षमता शामिल है।

आगे की संभावनाओं की बात करें तो करीब 135 गीगावॉट अतिरिक्त रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विभिन्न चरणों में निर्माण या टेंडर प्रक्रिया में है। साथ ही, बिजली दरें भी प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं। यूटिलिटी-लेवल सोलर के लिए रिकॉर्ड कम बोली 2.44 से 2.55 रुपये प्रति यूनिट के बीच सामने आ रही है, जो यह संकेत देती है कि क्लीन एनर्जी तकनीक अब न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो रही है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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