2029-30 तक 26 हजार गांवों में पहुंचेगा डेयरी नेटवर्क, दूध उत्पादन से बढ़ेगा ग्रामीण रोजगार

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को रोजगार और आयवृद्धि का मजबूत आधार बनाने के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की गई है। लक्ष्य है कि वर्ष 2029-30 तक 26 हजार गांवों तक डेयरी सहकारी नेटवर्क का विस्तार किया जाए। इसके तहत दूध उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़कर किसानों और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम स्तर तक डेयरी से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए और दुग्ध संकलन व्यवस्था की कड़ी निगरानी हो। दूध खरीदी की कीमतें उत्पादकों के लिए लाभकारी हों और भुगतान समय-सीमा में पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में डेयरी गतिविधियों का विस्तार पीपीपी मॉडल के तहत निजी भागीदारी और डेयरी सहकारी समितियों के समन्वय से किया जाएगा। इससे उद्यमशीलता को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। साथ ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में डेयरी टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ रोजगार मिल सके।
सरकार का फोकस सांची ब्रांड के विस्तार पर भी है। दुग्ध उत्पादों की ब्रांडिंग में गोवंश और गोपाल को शामिल करने की योजना बनाई गई है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से सांची ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा है और कई क्षेत्रों से नई डेयरी शुरू करने की मांग सामने आ रही है।
अब तक 1,241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है, जबकि 635 निष्क्रिय समितियों को दोबारा सक्रिय किया गया है। दुग्ध उत्पादकों को समय पर भुगतान के लिए 10 दिन का रोस्टर तय किया गया है। दूध खरीदी के दामों में प्रति लीटर 2.50 रुपये से 8.50 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।
योजना के अनुसार प्रतिदिन 52 लाख किलोग्राम दुग्ध संकलन, 35 लाख लीटर दुग्ध विक्रय और 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। शिवपुरी में बंद डेयरी संयंत्र को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जबलपुर में पनीर प्लांट के पुनरारंभ के लिए निवेश किया जाएगा, जबकि इंदौर में दूध पाउडर संयंत्र से प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से दुग्ध उत्पादन न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाएगा, बल्कि प्रदेश में स्थायी रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।









