डूंगरपुर जिला अस्पताल में अब नि:शुल्क पार्किंग का आश्वासन, 16 दिन बाद बीपीएमएम का धरना समाप्त

डूंगरपुर: जिला अस्पताल में पार्किंग शुल्क की मनमानी और अवैध वसूली के खिलाफ भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा (बीपीएमएम) द्वारा पिछले 16 दिनों से चलाया जा रहा महापड़ाव (धरना) मंगलवार को आखिरकार समाप्त हो गया है. कड़ाके की ठंड और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मोर्चा के कार्यकर्ता विगत 16 दिन से अस्पताल के मुख्य द्वार पर डटे हुए थे, जिससे प्रशासन पर भारी दबाव देखा जा रहा था.
मंगलवार को आंदोलन के 16वें दिन अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेंद्र डामोर ने धरना स्थल पर पहुंचकर मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की. वार्ता के दौरान अधीक्षक ने कार्यकर्ताओं की जायज मांगों पर सहमति जताते हुए सशर्त मौखिक आश्वासन दिया. उन्होंने आश्वासन दिया कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों से अब पार्किंग का कोई पैसा नहीं वसूला जाएगा.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्किंग शुल्क की समीक्षा की जाएगी और आम जनता को राहत देने के लिए नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि पार्किंग व्यवस्था को सुचारू बनाने और टेंडर प्रक्रिया को लेकर आगामी ‘अस्पताल कमेटी’ की बैठक में चर्चा की जाएगी. बैठक में टेंडर को लेकर जो भी नियम या निर्णय तय होंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
​भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत ने बताया कि सरकार की ओर से जिला अस्पताल में इलाज, दवाइयां और जांच जैसी तमाम सुविधाएं नि:शुल्क हैं. इसके बावजूद पार्किंग ठेकेदार द्वारा मरीजों और उनके परिजनों से मनमर्जी से पैसा वसूला जा रहा था. इतना ही नहीं, कई बार पार्किंग शुल्क को लेकर आम जनता के साथ बदसलूकी और मारपीट की घटनाएं भी सामने आई थीं. इसी “अवैध वसूली” और “गुंडागर्दी” के खिलाफ बीपीएमएम पिछले 16 दिनों से अस्पताल परिसर में धरने पर बैठा.
इस दौरान प्रदर्शनकारियों की अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेंद्र डामोर और प्रशासन के साथ कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पा रहा था. मंगलवार को डॉ. महेंद्र डामोर ने मध्यस्थता करते हुए मौखिक आश्वासन दिया है कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए पार्किंग पूरी तरह नि:शुल्क रहेगी. इस आश्वासन के बाद धरना समाप्त करने की घोषणा की है.
बीपीएमएम प्रदेश प्रचारक मुकेश कलासुआ ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है बल्कि प्रशासन के भरोसे पर स्थगित किया गया है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि दिए गए मौखिक आश्वासन को जल्द ही धरातल पर लागू नहीं किया गया, तो वे फिर से आंदोलन की राह पकड़ेंगे. जनहित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल धरने को विराम दिया गया है.
​इस निर्णय के बाद अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मौखिक वादे को लिखित आदेश में कब तक बदलता है.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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