नए साल से ठीक पहले गिग वर्कर्स की हड़ताल, कंपनी ने डिलीवरी पार्टनर का इंसेंटिव बढ़ाया

नई दिल्ली : ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स की हड़ताल जारी है. उन्होंने अपना वेतन बढ़ाए जाने और 10 मिनट डिलीवरी के विकल्प को खत्म करने की मांग की है. गिग वर्कर्स यूनियन की हड़ताल के बीच फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और स्विगी ने अपने-अपने डिलीवरी पार्टनर का इंसेंटिव बढ़ा दिया है, ताकि उनकी सेवाएं बाधित न हों. ऑनलाइन फूड डिलीवरी के क्षेत्र में यह एक आम प्रैक्टिस है.
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ने दावा किया है कि बेहतर पेमेंट और बेहतर काम करने की स्थितियों की मांग को लेकर लाखों वर्कर्स देशव्यापी हड़ताल में शामिल हैं. इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, इस हड़ताल से नए साल की शाम को जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकट, इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसी फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनियों के कामकाज पर असर पड़ सकता है, क्योंकि इस समय डिमांड पिक पर होती है. इन संगठनों ने अपने संयुक्त बयान में कहा, “कल रात तक, पूरे भारत में 1.7 लाख से ज़्यादा डिलीवरी और ऐप-बेस्ड वर्कर्स ने हिस्सा लेने की पुष्टि की है, और शाम तक यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है.”
हड़ताल में शामिल एक गिग वर्कर्स ने मीडिया को बताया कि उन्हें कंपनी के साथ रेट कार्ड को लेकर भी समस्या है. उन्होंने कहा कि कंपनी उन्हें बीमा का भी फायदा नहीं देती है. वर्कर्स ने बताया कि ग्राहक किसी भी वजह से ऑर्डर को कैंसिल करते हैं, तो कंपनी राइडर पर जुर्माना लगा देती है.
एक डिलीवरी एजेंट ने कहा, “हड़ताल पूरे देश में चल रही है. रोजाना मजदूरी पर निर्भर लोगों के लिए यहां हड़ताल में थोड़ी ढील दी गई है. हड़ताल का कारण ठीक से कमाई न होना है.”
डिलीवरी एग्जीक्यूटिव संजीव कुमार शर्मा ने कहा, “मैं पिछले 7 सालों से स्विगी के साथ काम कर रहा हूं. हमें सही इंसेंटिव नहीं मिलते. हमें बहुत परेशानी हो रही है. अगर कोई एक्सीडेंट हो जाए तो हमें कुछ नहीं मिलता. एक दिन में हम 700-800 रुपये कमाते हैं. एक महीने में हम 10,000 से 12,000 रुपये कमाते हैं. हम चाहते हैं कि काम टाइम-बाउंड हो, और हमें सैलरी बेस्ड सिस्टम पर काम करना चाहिए.” महेश कहते हैं, “हमें इज्जत मिलनी चाहिए. हम अक्सर कई फ्लैट्स में देखते हैं कि ‘स्विगी-ज़ोमैटो वर्कर्स लिफ्ट इस्तेमाल नहीं कर सकते’ लिखा होता है. हम इस भेदभाव के हकदार नहीं हैं.”
जोमैटो ने नए साल की शाम को शाम छह बजे से रात 12 बजे के बीच पीक आवर्स में डिलीवरी पार्टनर्स को प्रति ऑर्डर 120 रुपये से 150 रुपये का पेमेंट देने की पेशकश की है. इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि प्लेटफॉर्म ने ऑर्डर की संख्या और वर्कर की उपलब्धता के आधार पर, पूरे दिन में 3,000 रुपये तक की कमाई का भी वादा किया है. उन्होंने यह भी बताया कि जोमैटो ने ऑर्डर कैंसिल करने और मना करने पर लगने वाली पेनल्टी को कुछ समय के लिए हटा दिया है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि यह अधिक डिमांड वाले त्योहारों और साल के आखिर के समय में फॉलो किया जाने वाला एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल है.
जोमैटो के एक प्रवक्ता ने बताया, “यह त्योहारों के समय हमारे स्टैंडर्ड सालाना ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल का हिस्सा है, जिसमें आमतौर पर अधिक डिमांड के कारण अधिक कमाई के मौके मिलते हैं.” इटरनल जोमैटो और ब्लिंकिट ब्रांड्स की मालिक है.
जोमैटो की तरह स्विगी ने भी अपने पार्टनर के लिए इंसेंटिव बढ़ाने की घोषणा की है. उन्होंने 31 दिसंबर और एक जनवरी की डिलीवरी वर्कर्स को 10 हजार रुपये तक की कमाई का मौका दिए जाने की बात कही है. स्विगी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार उनका प्लेटफॉर्म शाम छह बजे से रात 12 बजे के बीच छह घंटे के पीक आवर में दो हजार रुपये की कमाई का एड दे रहा है. उन्होंने कहा कि वह यह सब राइडर्स की पर्याप्त उपलब्धता रखने के लिए कर रहे हैं.
दूसरी ओर, जानकारों ने बताया कि 25 दिसंबर की बड़ी हड़ताल के बाद, जिसमें तेलंगाना और दूसरे इलाकों में हजारों डिलीवरी वर्कर्स ने प्लेटफॉर्म से लॉग ऑफ कर दिया था, गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर, 2025 को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है, यह बात TGPWU और IFAT के जॉइंट स्टेटमेंट में कही गई है.
संगठन ने कहा, “25 दिसंबर की कार्रवाई ने प्लेटफॉर्म कंपनियों को कम कमाई, असुरक्षित डिलीवरी के दबाव और काम पर सम्मान की कमी के बारे में साफ चेतावनी दी थी.हालांकि, कंपनियों ने चुप्पी साधे रखी. कम पेमेंट को वापस नहीं लिया, वर्कर्स से कोई बातचीत नहीं की, और सुरक्षा या काम के घंटों पर कोई ठोस भरोसा नहीं दिलाया. इस लगातार अनदेखी की वजह से हड़ताल ज़रूरी हो गई है.”
गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने भी पूरे भारत में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के अधिकारों, भलाई और गरिमा से जुड़ी मांगों को सामूहिक रूप से उठाने के लिए 31 दिसंबर 2025 को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. कार्रवाई का आह्वान करते हुए, यूनियन ने कहा, “सभी गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म वर्कर्स, ऐप-बेस्ड वर्कर्स और ऑनलाइन फ्रीलांसरों से विनम्र निवेदन है कि वे 31 दिसंबर 2025 को काम से जुड़े सभी एप्लिकेशन बंद करके और सेवाएं देना बंद करके राष्ट्रीय हड़ताल में हिस्सा लें, ताकि हड़ताल एकजुट और प्रभावी बन सके.”









