एक के बाद एक और शर्मनाक कांड! शराबी प्रधान पाठक का हंगामा, प्रतापपुर की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी…

सूरजपुर: प्रतापपुर विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था की हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है. वासुदेवपुर दवनकरा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में आदिवासी मासूम बच्चों से झाड़ू लगवाने और शौचालय साफ करवाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ग्राम पंचायत बरपटिया स्थित प्राथमिक शाला से एक और गंभीर आरोप सामने आ गया है. यहां पदस्थ प्रधान पाठक विफल राम पर विद्यालय समय के दौरान शराब के नशे में स्कूल पहुंचने और कर्मचारियों से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है.
ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ के अनुसार घटना के दिन प्रधान पाठक की हालत सामान्य नहीं थी. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वे ठीक से खड़े तक नहीं हो पा रहे थे और कर्मचारियों से ऊंची आवाज में अभद्र व्यवहार कर रहे थे. कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पहली बार नहीं है, पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई के अभाव में मामला दब जाता रहा.
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में दवनकरा स्कूल का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आदिवासी बच्चों से झाड़ू लगवाने की पुष्टि हुई. जिला स्तरीय जांच में आरोप सही पाए गए और पांच शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोक दी गई. विकासखंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर अंतिम चेतावनी दी गई. इसके बावजूद ब्लॉक में अनुशासनहीनता और लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और प्रभावी मॉनिटरिंग होती तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने नहीं आतीं। प्रतापपुर क्षेत्र आदिवासी बहुल है, जहां के बच्चे पहले ही आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यदि शिक्षक ही गैरजिम्मेदाराना व्यवहार करें तो बच्चों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है. अभिभावकों ने चिंता जताई है कि नशे की हालत में स्कूल आना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि बच्चों के सामने गलत उदाहरण भी प्रस्तुत करता है.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मामले पर नाराजगी व्यक्त की है. उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रधान पाठक पर कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि केवल चेतावनी या वेतन वृद्धि रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय कर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.
लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रतापपुर ब्लॉक की शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर बच्चों से झाड़ू लगवाने की पुष्टि, दूसरी ओर नशे में शिक्षक के स्कूल पहुंचने का आरोप ये घटनाएं बताती हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है. अब नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इन मामलों को किस गंभीरता से लेता है और क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं.
अभिभावक और ग्रामीण स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है. फिलहाल प्रतापपुर की शिक्षा व्यवस्था चर्चा के केंद्र में है और जवाबदेही तय होने की प्रतीक्षा की जा रही है.











