भागवत बोले— हिंदू एकता, तीन बच्चे और घर वापसी जरूरी

मोहन भागवत ने हिंदू समाज से संगठित और सशक्त बनने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को अपनी जनसंख्या, एकता और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए, क्योंकि कम जनसंख्या भविष्य में समाज के अस्तित्व के लिए चुनौती बन सकती है।
उन्होंने घटती जनसंख्या, मतांतरण और घुसपैठ को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि लालच और दबाव में हो रहे धर्म परिवर्तन को रोकना आवश्यक है। उन्होंने ‘घर वापसी’ पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग वापस अपने धर्म में लौटना चाहते हैं, उनका सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए।
संघ प्रमुख ने कहा कि समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखना जरूरी है और भेदभाव तथा आपसी संघर्ष से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी लोग एक ही मातृभूमि के पुत्र हैं और समाज में एकता और सहयोग की भावना से ही विकास संभव है।
उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मातृशक्ति परिवार और समाज की आधारशिला है। महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना चाहिए और उन्हें कमजोर नहीं बल्कि सशक्त मानना चाहिए।
यूजीसी नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना जरूरी है, लेकिन यदि किसी कानून में खामी है तो उसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और अन्य आधारों पर भेदभाव खत्म होना चाहिए और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत भविष्य में विश्व का मार्गदर्शन करेगा और समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए।











