बलिया: ‘नगर पालिका’ हुई ‘नरक पालिका’, कूड़े के ढेर पर सो रहा प्रशासन; जनता बोली- ‘साहब! ज़रा मास्क तो उतारिये

बलिया : कहते हैं कि बलिया के लोग बागी होते हैं, लेकिन इन दिनों यहाँ की नगर पालिका ने भी व्यवस्था से ऐसी ‘बगावत’ की है कि स्वच्छता अभियान ही दम तोड़ रहा है. शहर की सड़कों पर इन दिनों कचरे का ऐसा साम्राज्य है कि आपको रास्ता ढूँढने के लिए जीपीएस की नहीं, बल्कि बदबू की दिशा पहचानने की ज़रूरत है. दावों की हकीकत खुद सड़कें चीख-चीख कर बता रही हैं, लेकिन शायद हुक्मरानों के कान कचरे के ढेर से भी ज़्यादा भारी हो गए हैं.
पशु चिकित्सालय बना ‘संक्रमण का गेटवे’
सबसे शानदार नज़ारा तो पशु चिकित्सालय के ठीक बाहर है. एक तरफ जानवरों के इलाज की बात होती है, दूसरी तरफ नगर पालिका ने कूड़े का ऐसा ‘पहाड़’ खड़ा कर दिया है कि भला-चंगा इंसान भी संक्रमण का शिकार हो जाए. स्थानीय निवासी मनीष गुप्ता कहते हैं कि यहाँ से गुज़रना किसी जंग जीतने से कम नहीं है. नाक बंद करके निकलना अब यहाँ का नया ‘फैशन’ बन चुका है. कूड़ा सड़क पर इस कदर फैल गया है कि रेलवे स्टेशन जाने वाले मुसाफिरों को समझ नहीं आता कि वो सड़क पर चल रहे हैं या डस्टबिन के अंदर.
कुंभकर्णीय नींद में जिम्मेदार, जेसीबी से होता है ‘एहसान’.
नगर पालिका की कार्यशैली भी गजब है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शिकायतें हद से बढ़ जाती हैं, तो विभाग की तरफ से एक जेसीबी भेजकर कूड़े को थोड़ा किनारे करवा दिया जाता है. मोनू कुमार की मानें तो यह सफाई नहीं, बल्कि जनता पर ‘एहसान’ है. गौरव दुबे का आरोप है कि यह समस्या सिर्फ एक गली की नहीं है, होली बीत गई, लेकिन शहर की गलियों में जमा कचरा आज भी नगर पालिका की ‘मनमानी’ और ‘लापरवाही’ की गवाही दे रहा है.नगर पालिका तो अब ‘नरक पालिका’ बन चुकी है. हम टैक्स भर रहे हैं और बदले में हमें मिल रही है सड़ांध और बीमारियाँ. जनता त्रस्त है, और विभाग मस्त है.
जाम और बीमारी का डबल डोज़
ई-रिक्शा चालक अकबर अली का दर्द भी कम नहीं है. उनके मुताबिक, कूड़े की वजह से सड़क आधी हो चुकी है, जिससे आए दिन भयंकर जाम लगता है. प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे या महामारी के फैलने का इंतज़ार कर रहा है, तभी तो विभाग की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही.
सवाल तो लाजमी है
क्या बलिया को ‘स्वच्छ’ बनाने का जिम्मा सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या जिम्मेदार अधिकारी अपनी एसी गाड़ियों के शीशे चढ़ाकर इस बदबू से बच निकलते हैं? जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक उन्हें इस ‘नरक’ में रहने को मजबूर किया जाएगा? साहब! अब तो जाग जाइए, इससे पहले कि शहर कूड़े के ढेर में पूरी तरह दफन हो जाए.











