सर्वाइकल कैंसर टीकाकरण में छत्तीसगढ़ की रफ्तार धीमी, जागरूकता और अफवाह बनी बड़ी वजह

केंद्र सरकार के एचपीवी टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राज्य में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए 2.62 लाख टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 12,302 किशोरियों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है। इस तरह प्रदेश का टीकाकरण कवरेज महज 4.7 प्रतिशत तक पहुंच पाया है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

जागरूकता की कमी से पिछड़ा अभियान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, नियमित स्वास्थ्य जांच का अभाव, शर्म और झिझक जैसी वजहों से अभियान प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच और प्रचार-प्रसार की कमी भी टीकाकरण की धीमी गति का कारण मानी जा रही है। इसी वजह से छत्तीसगढ़ देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में काफी पीछे पहुंच गया है।

अफवाहों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ भ्रामक वीडियो और संदेशों ने भी अभियान को प्रभावित किया है। एक वायरल वीडियो में दावा किया गया कि एचपीवी वैक्सीन लगने के बाद लड़कियां मां नहीं बन सकेंगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इन दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। विभाग का कहना है कि यह वैक्सीन वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित है और सर्वाइकल कैंसर से बचाव में प्रभावी मानी जाती है। मामले में अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।

विशेषज्ञ बोले- टीकाकरण से 90 प्रतिशत तक बचाव संभव

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली गंभीर बीमारी है, जो ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक किशोरियों को समय पर एचपीवी वैक्सीन लगाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और 90 प्रतिशत तक कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और टीकाकरण अभियान में सहयोग करने की अपील कर रहा है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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