खामेनेई की अंतिम यात्रा को लेकर ईरान हाई अलर्ट पर, भारी भीड़ के मद्देनजर व्यापक सुरक्षा इंतजाम

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा को लेकर प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम यात्रा में भारी भीड़ उमड़ने की आशंका के चलते संभावित भगदड़ और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने अनुमान जताया है कि अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए राहत एवं बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। तेहरान में मृतकों और लापता लोगों के लिए विशेष प्रबंधन इकाइयों का गठन किया गया है, जबकि राजधानी के बेहेश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में अतिरिक्त कब्रों की भी व्यवस्था की गई है।
जानकारी के अनुसार, अली खामेनेई का पार्थिव शरीर 6 जुलाई तक तेहरान के ग्रैंड प्रेयर हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद तेहरान, कोम तथा इराक के नजफ और करबला सहित प्रमुख शिया धार्मिक स्थलों से अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
भीड़ नियंत्रण के लिए तेहरान में 24 घंटे मेट्रो और बस सेवाएं संचालित करने की योजना बनाई गई है। हजारों अतिरिक्त बसें तैनात की गई हैं, जबकि स्कूलों और मस्जिदों को बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए तैयार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी में निगरानी बढ़ा दी है और कुछ क्षेत्रों में यातायात तथा हवाई सेवाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
ईरान इस आयोजन को लेकर अतिरिक्त सतर्क इसलिए भी है क्योंकि इससे पहले बड़े जनाजों के दौरान भगदड़ जैसी घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है। वर्ष 2020 में आईआरजीसी कमांडर कासिम सुलेमानी के जनाजे में भगदड़ से 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 1989 में आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की अंतिम यात्रा के दौरान भी जान-माल का नुकसान हुआ था।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सरकार केवल भीड़ प्रबंधन ही नहीं, बल्कि आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। ऐसे में पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर रहेंगी।











