कैका-चेरबहार में मवेशी का शिकार, बाघ या तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत

बस्तर के कैका-चेरबहार क्षेत्र में एक हिंसक वन्यजीव द्वारा गाय का शिकार किए जाने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। घटना के बाद ग्रामीणों के बीच बाघ या तेंदुए की मौजूदगी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, वन विभाग ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार करते हुए जांच जारी होने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार, भूमकाल सिरहा के घर के पास रविवार सुबह ग्रामीणों को एक गाय मृत अवस्था में मिली। घटनास्थल पर गाय के शव को खेत की ओर घसीटकर ले जाने के निशान भी मिले। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और पंजों के निशानों के आधार पर जांच शुरू कर दी।
ग्रामीणों का दावा है कि रात करीब 9 बजे खेत की ओर से गाय के रंभाने की आवाज सुनाई दी थी, जिसके कुछ देर बाद आवाज बंद हो गई। सुबह तलाश करने पर गाय का शव मिला। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी इलाके में बाघ की मौजूदगी की चर्चाएं होती रही हैं।
वन विभाग को घटनास्थल पर बड़े आकार के पंजों के कई निशान मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिकार का तरीका किसी बड़े हिंसक वन्यजीव की ओर संकेत करता है, लेकिन यह बाघ है या तेंदुआ, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।
वन विभाग ने क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाने और जंगल से लगे इलाकों में निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे रात के समय अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाएं और सतर्कता बरतें।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र इंद्रावती टाइगर रिजर्व और ओडिशा के वन क्षेत्रों से जुड़े वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है, जहां बड़े वन्यजीवों की आवाजाही की संभावना बनी रहती है। विभाग का कहना है कि कैमरा ट्रैप और जांच रिपोर्ट के बाद ही हमलावर वन्यजीव की पहचान स्पष्ट हो सकेगी।











