कुंभ के बजट पर सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी, बोले- 0.1% राशि स्कूलों पर खर्च होती तो बदल जाती तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीवी वराले ने महाराष्ट्र के नासिक में होने वाले कुंभ मेले के बजट को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि कुंभ के लिए तय बजट का सिर्फ 0.1 प्रतिशत हिस्सा भी मराठी माध्यम के स्कूलों पर खर्च किया जाता तो कई स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था। उन्होंने स्कूलों की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए शिक्षा के लिए बजट बढ़ाने की जरूरत बताई।

स्कूलों की स्थिति पर जताई चिंता

जस्टिस वराले ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि महाराष्ट्र में फंड की कमी के कारण करीब 100 मराठी माध्यम के स्कूल बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों की हालत पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि नासिक कुंभ के लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि बुनियादी ढांचे और अन्य विकास कार्यों पर खर्च की जा रही है। ऐसे में अगर बजट का केवल 0.1 प्रतिशत हिस्सा भी स्कूलों के लिए इस्तेमाल किया जाता तो 100 से 150 स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था।

शिक्षा बजट में कमी पर सवाल

जस्टिस वराले ने कहा कि पहले शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन 8 से 12 प्रतिशत के बीच रहता था, लेकिन इसमें अब गिरावट आई है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने आवासीय विद्यालयों की स्थिति पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।

जस्टिस वराले ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक स्थान पर तीन छात्राएं फर्श पर सो रही थीं और सांप के काटने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं स्कूलों और छात्रावासों की बदहाल व्यवस्था को उजागर करती हैं।

नासिक कुंभ के लिए हजारों करोड़ का बजट

नासिक में वर्ष 2027 में कुंभ मेले का आयोजन होना है। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। महाराष्ट्र सरकार के अनुसार कुंभ के विकास प्लान पर करीब 22,425.39 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। वहीं स्थायी और अस्थायी विकास कार्यों के लिए करीब 34,732 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

नासिक प्राधिकरण के अनुमान के मुताबिक कुंभ मेले में करीब 12 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। रेलवे के अनुसार करीब 3 करोड़ श्रद्धालु ट्रेन के जरिए नासिक पहुंच सकते हैं।

कौन हैं जस्टिस पीवी वराले

जस्टिस पीवी वराले का जन्म निप्पाणी में हुआ था। वह वर्ष 2024 से सुप्रीम कोर्ट के जज हैं और जून 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले वह कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के नांदेड़, लातूर और नासिक से शुरुआती शिक्षा हासिल की। इसके बाद कानून की पढ़ाई की और वर्ष 2008 में बॉम्बे हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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