बलरामपुर: हिंसा, भ्रष्टाचार और विवादों से घिरे डिप्टी कलेक्टर को SDM की जिम्मेदारी क्यों? आदिवासी की मौत पर उठे गंभीर सवाल

बलरामपुर: जिले के कुसमी क्षेत्र में 62 वर्षीय आदिवासी वृद्ध की कथित पिटाई से मौत के मामले ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है. इस मामले में आरोपी बनाए गए एसडीएम करुण डहरिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है. उनके साथ तीन अन्य आरोपियों को भी अदालत में पेश कर जेल दाखिल किया गया.

मृतक वृद्ध रामनरेश राम किसान गेहूं की सिंचाई कर घर लौट रहे थे, तभी विवाद की स्थिति बनी और मामला मारपीट तक पहुंच गया. परिजनों का आरोप है कि एसडीएम डहरिया कथित अवैध बॉक्साइट कारोबार से जुड़े लोगों के साथ बिना पुलिस बल के घटनास्थल पर पहुंचे और विवाद बढ़ा. गंभीर चोटों के कारण वृद्ध की मौत हो गई. वही दो अन्य साथी भी बुरी तरीके से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल लाया गया.

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल अवैध बॉक्साइट खनन और उसके कथित संरक्षण को लेकर उठ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध उत्खनन की शिकायतें होती रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब जब एक जान चली गई, तब जांच की बात हो रही है. ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.

घटना की रात एसडीएम के बिना पुलिस बल मौके पर पहुंचने को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारी संवेदनशील मामले में पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करते हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ. यही तथ्य अब जनाक्रोश का प्रमुख कारण बन गया है.

सूत्रों के अनुसार, एसडीएम डहरिया पूर्व में भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं. बावजूद इसके उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं. अब इस घटना ने प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है.

घटना के विरोध में कुसमी क्षेत्र में व्यापक आक्रोश देखने को मिला. कई व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और लोगों ने प्रदर्शन किया. पूर्व मंत्री अमरजीत भगत सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी मृतक के समर्थन में सड़कों पर उतरे और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की.

सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने मांग की है कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ केवल आपराधिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर भी कठोर कदम उठाए जाएं. सेवा समाप्ति और अवैध खनन से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है.

पुलिस ने हत्या सहित अन्य धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है. अब यह देखना अहम होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या अवैध बॉक्साइट कारोबार के कथित संरक्षण का भी खुलासा हो पाता है या नहीं. फिलहाल, बलरामपुर में यह मामला केवल एक हत्याकांड नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और अवैध खनन के मुद्दे पर बड़े सवालों का केंद्र बन गया है. लोगों के बीच रह कर यह सवाल उत्पन्न हो रहा है कि विवादों में रहने वाले डिप्टी कलेक्टर करूंगा लहरिया आखिर ऐसा कौन सा अप्रोच रखते हैं कि जिला कलेक्टर उन्हें बलरामपुर जिले के विभिन्न विकासखंडो में एसडीएम की जिम्मेदारी देकर भेजा है.

सूत्रों की माने तो करुण डहरिया वसूली में काफी माहिर है, यही कारण है कि बीते दिनों एसीबी के हाथों घूस लेते रंगो हाथ पकड़े गए थे. बहरहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब लोगों की नजर टिकी है कि राज्य शासन ऐसे बेलगाम अधिकारी पर उचित व बड़ी कार्यवाही करें. पूरे मामले में कांग्रेस ने 10 सदस्यई जांच कमेटी का गठन भी किया है. जिन्हें यह आदेश भी दिया गया है कि अभिलंब पूरे प्रकरण की जांच कर जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौपी की जाए जाये.

हालांकि पूरे मामले में बलरामपुर जिले के पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने साफ तौर पर कहा है कि मामले में कोई भी व्यक्ति हो जांच के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा. खैर पुलिस अधीक्षक की बात की जाए तो वैभव बैंकर पर किसी प्रकार का दबाव संभव नहीं है. पुराने कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो बलरामपुर के कप्तान पारदर्शी व निडर रूप से कार्रवाही के लिए जाने जाते है.

हालांकि पूरे मामले में बलरामपुर पुलिस की फजीहत बढ़ती दिखाई थी पुलिस ने पीएम के बाद 100 का संपूर्ण नाम भी परिजनों को सौंप दिया था. इसके बावजूद भी परिजन शव को नहीं लेकर गए थे. आज शाम काफी समझाइए इसके बाद परिजनों ने शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने पर राजी हुए.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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