डाॅ. बी. आर. आंबेडकर की श्रेष्ठता के पीछे उनका वर्षो का संघर्ष है: प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल

रायपुर। किसी भी व्यक्ति की श्रेष्ठता के पीछे उनके कई वर्षो के संघर्ष का परिणाम होता है। कोई भी व्यक्ति बिना संघर्ष के महान नहीं हुआ है जैसे कि बाबा साहब डाॅ. भीमराव आंबेडकर, यह वक्तव्य प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलपति, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने आज दिनांक 14 अप्रैल को अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 136वीं जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नवीन मार्कंडेय, पूर्व विधायक आरंग (जिला रायपुर) थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मनोज दयाल, कुलपति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर तथा प्रोफेसर एस.के. जाधव, प्राध्यापक (जैव प्रौद्योगिकी) उपस्थित थे। वक्ता के रूप में एस.एल. कुंजाम, महासचिव अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी परिषद उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला, कुलपति पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अंबेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। स्वागत भाषण प्रोफेसर बी.एल. सोनकर द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रथम वक्ता के रूप में एस.एल. कुंजाम ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान की रचना की तथा संविधान की उद्देशिका के माध्यम से भारत निर्माण की दिशा स्पष्ट की। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एस.के. जाधव ने डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला तथा संस्कृति के पाँचवें अध्याय में डॉ. अंबेडकर के योगदान पर चर्चा की। प्रोफेसर मनोज दयाल ने कहा कि डॉ. अंबेडकर आज विश्व में समृद्ध विचारधारा के प्रेरणास्रोत हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन भी अपने विचारों के लिए डॉ. अंबेडकर को आदर्श मानते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. नवीन मार्कंडेय ने कहा कि आज डॉ. अंबेडकर भारत की राजनीति के महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु हैं। उनके संघर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जीवन भर उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, किंतु उनके संघर्ष ने उन्हें महान बनाया। उन्होंने राज्यसभा में पहुँचकर आम जनता की आवाज को सशक्त किया। “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” एवं “सबका साथ, सबका विकास” जैसी योजनाएँ उनकी विचारधारा को प्रतिबिंबित करती हैं। आज भारत में समरसता और एकता उनके कार्यों का ही परिणाम है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ल ने कहा कि संघर्ष से ही व्यक्ति श्रेष्ठता प्राप्त करता है। डॉ. अंबेडकर का जीवन इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। उनके द्वारा संविधान निर्माण, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना तथा अन्य महत्वपूर्ण कार्य देशहित में रहे। संविधान की प्रस्तावना के शब्द “हम भारत के लोग” में समस्त मानव कल्याण की भावना निहित है।
अंत में कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ. अर्चना सेठी तथा संचालन डॉ. सुनील कुमेटी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक एवं कर्मचारी, जैसे प्रो. आर.के. ब्रह्मे , प्रो. जितेंद्र प्रेमी, प्रो. केशव साहू, प्रो. एस.के. डहरवाल , प्रो. निस्तार कुजूर, प्रो जी.के. देशमुख, डॉ. डी.एन. खुटे, डॉ. भूमिराज पटेल, डॉ. डी.के. गंगेश्वर, डॉ. दिलीप धृतलहरे, तथा अनेक अतिथि कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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