मिशन अस्पताल कैंपस पर चला बुलडोजर, हाईकोर्ट ने लीज रिन्युअल की अपील खारिज की: कहा- नवीनीकरण कोई ऑटोमेटिक अधिकार नहीं

बिलासपुर के मिशन अस्पताल कैंपस में गुरुवार सुबह नगर निगम का बुलडोजर चला। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की लीज रिन्युअल से जुड़ी अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लीज का नवीनीकरण कोई पक्का या स्वचालित अधिकार नहीं होता, यह तभी संभव है जब किरायेदार मूल शर्तों का पालन करे।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुबह 7 बजे नगर निगम का अतिक्रमण दस्ते ने मिशन अस्पताल पहुंचकर अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों और अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। प्रशासन ने परिसर में मौजूद किरायेदारों को घर खाली करने के निर्देश दिए और कुछ हिस्सों को ध्वस्त कर दिया।
यह जमीन क्रिश्चियन वीमेंस बोर्ड ऑफ मिशन के डायरेक्टर नितिन लॉरेंस और उनके सहयोगियों को लीज पर दी गई थी। उन्होंने प्रशासन के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे पहले सिंगल बेंच ने और अब डिवीजन बेंच ने भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 27 साल तक लीज रिन्युअल की कोई मांग नहीं की गई और इस दौरान कई शर्तों का उल्लंघन हुआ।
रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि 16 अगस्त 2024 को नजूल तहसीलदार ने अवैध निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया था, लेकिन इसे किसी अन्य फोरम में चुनौती नहीं दी गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन से जुड़े एक व्यक्ति ने स्वेच्छा से जमीन का बड़ा हिस्सा सरकार को सौंप दिया। प्रशासन का कहना है कि अब उस भूमि पर सरकारी कब्जा बरकरार है।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं के पास न तो कोई वैध स्वामित्व का अधिकार है और न ही वे मूल अलॉटी का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इसलिए लीज रिन्युअल की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अस्पताल कैंपस में कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस बल की मौजूदगी में क्षेत्र में शांति बनी हुई है।










