कार्बाइड गन जिसने पूर्वांचल के 65 बच्चों की आंखों की रोशनी छिनी… 10 बच्चे गाजीपुर के भी शामिल

गाजीपुर: प्लास्टिक की पाइप और यूट्यूब देखकर कार्बाइड गन जो गाजीपुर सहित आसपास के जनपदों में पहले फसलों को नुकसान करने वाले जानवरों को भागने के लिए बनाया गया था जो कुछ समय तक तो ग्रामीण इलाकों में किसानों को लाभ दिया लेकिन इसी कार्बाइड गन को लेकर बीएचयू के एक रिपोर्ट सामने आई है की, गाजीपुर सहित पूर्वांचल के करीब 65 बच्चों की आंखों की रोशनी छीन लिया है. जिसमें से 30 से अधिक बच्चे 14 साल से कम उम्र के हैं जबकि 10 युवा 18-23 वर्ष के हैं जिसको लेकर डॉक्टर का कहना है कि अब सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचा है. डॉक्टर की बात माने तो इस तरह के मरीज मुहम्मदाबाद, भांवरकोल ,जमानिया, खानपुर सहित कई इलाकों से आए हुए थे और उनके साथ कार्बाइड गन का कितना असर हुआ इन तीन तस्वीरों को देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है.

ऐसे में यह सभी पीड़ित बच्चे जो आजमगढ़ ,गाजीपुर, मऊ, बलिया जौनपुर समेत अन्य जनपदों के थे. गाजीपुर में भी ऐसे करीब 10 से ऊपर पीड़ित बच्चे गाजीपुर के मेडिकल कॉलेज में दीपावली के दिन ही पहुंचे थे जिनका इलाज खुद नेत्र सर्जन डॉक्टर स्नेह लता सिंह के द्वारा किया गया. उन्होंने बताया कि दीपावली का दिन होने की वजह से वह लोग पूजा की तैयारी कर रही थी लेकिन इसी बीच कई बार इमरजेंसी से फोन आया जिसके चलते उन्हें अपने पूजा भी छोड़कर जाना पड़ा जिसमें उन्होंने बताया कि करीब 10 बच्चे कार्बाईड गन से घायल होकर पहुंचे थे जिसमें से तीन से चार बच्चों के आंखों की स्थिति काफी क्रिटिकल हो गई थी और सभी को हायर सेंटर इलाज के लिए भेजा गया था.

नेत्र विभाग के आई सर्जन डॉक्टर स्नेहलता सिंह से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि गाजीपुर में लगभग 10 के आसपास आए थे दिवाली और छठ पूजा के दरमियान जिसमें से करीब 7 से 8 केस माइल्ड थे जिनके हाथ में या मुंह पर वर्न हुआ था लेकिन तीन से चार ऐसे मरीज थे जो काफी क्रिटिकल थे जिन्हें हायर सेंटर इलाज के लिए बोला गया क्योंकि उन लोगों के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ सकती थी.

बच्चों ने बताया था कि यूट्यूब से देखकर दो पाइपों के सहारे खुद कार्बाइड गन बनाए हुए थे और उसमें कार्बाइड की गोली पानी और फिर लाइटर से जलाकर उसका प्रयोग किए थे उन्होंने बताया कि कई बार उन लोगों ने प्रयोग किए थे लेकिन कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन कई बार ऐसे हुए की गोला सामने जाने के बजाय बैक आ गया था जिससे उन लोगों को दिक्कत आई थी.

उन्होंने बताया कि जो तीन से चार गंभीर मरीज आए थे उनके कार्निया भी रफ्चर हो गया था और कुछ लोगों को चोट की वजह से ट्रामा हो गया था जिसके वजह से कॉर्निया में इंजरी आ गई थी और कुछ के कार्निया फट भी गई थी और ज्यादा के इंजरी वर्न वाली थी क्योंकि कार्बाइड थर्मोकेमिकल इंजरी होती है जिसमें गर्मी वाला और केमिकल वाला थर्मोनेट होता है इसलिए इसमें डबल इंजरी हो जाती है इसमें गर्मी से जो कॉर्निया जलता है, वह तो होता ही है साथ में केमिकल जो आंखों के साथ रिएक्ट करता है तो वह बेस बना देता है. इसमें चोट के साथ होने पर आंखों में खून जम जाना या फिर डैमेज हो जाना भी होता है जिससे पीड़ितों को काफी दिक्कतें आती हैं.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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