सिवनी में एनएच 44 पर दो ट्रकों की टक्कर, 3 घंटे तक स्टेयरिंग में फंसा रहा ड्राइवर; 2 क्रेन की मदद से निकाला

छपारा/सिवनी। सिवनी जिले के छपारा क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे 44 पर बुधवार रात भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। रणधीर नगर व झिलमिली गांव के पास दो ट्रकों की आमने-सामने की टक्कर इतनी भीषण थी कि एक ट्रक का ड्राइवर केबिन में ही बुरी तरह फंस गया। करीब 3 घंटे चले कड़े रेस्क्यू आपरेशन के बाद ड्राइवर को सुरक्षित निकाला जा सका।

इस दौरान हाइवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसे खुलवाने में पुलिस को रात 2 बजे तक मशक्कत करनी पड़ी। दुर्घटना 25 फरवरी के रात 7 बजे हुई। जानकारी के अनुसार ग्वालियर से ट्रक लेकर ड्राइवर अरविंद यादव अपने पिता धनीराम यादव के साथ जा रहा था। तभी झिलमिली गांव के पास क्रासिंग में गांव की सड़क से हाईवे में दूसरा ट्रक आ गया, जिससे दोनों वाहनों की जोरदार टक्कर हो गई।

ड्राइवर को बाहर निकालने में करनी पड़ी मशक्कत

टक्कर के बाद ड्राइवर अरविंद यादव स्टेयरिंग व केबिन के बीच बुरी तरह फंस गया। मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस के स्टाफ प्रतुल श्रीवास्तव व स्थानीय लोगों ने तत्काल घायलों को मदद पहुंचाई। पिता धनीराम को मामूली चोटें आने पर प्राथमिक उपचार के लिए छपारा भेजा गया, लेकिन अरविंद को निकालने में पुलिस व प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

वहीं दुर्घटना के बाद एनएच 44 फोरलेन में सड़क की एक ओर से वाहन आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा में गलत दिशा में वाहनों के आने से सड़क में दोनों ओर कई किमी लंबा जाम लग गया। स्थिति को संभालने छपारा, बंडोल व लखनादौन थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।

लखनादौन एसडीओपी अपूर्व भलावी के नेतृत्व में पुलिस दल ने रात 2 बजे तक हाईवे में लगा जाम हटवाकर यातायात को सुचारू किया। लगभग 3 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद रात 11 बजे ट्रक के केबिन में फंसे ड्राइवर अरविंद को सुरक्षित बाहर निकालकर गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

3 घंटे की मशक्कत के बाद ड्राइवर को निकाला जा सका

दुर्घटना के बाद एक फिर फोरलेन में दुर्घटना प्रबंधन (एक्सीडेंट मैनेजमेंट) पर सवालिया निशान लग गया है। हालाकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से अधिकृत एजेंसी के कर्मचारी उपकरण लेकर तत्काल घटनास्थल पहुंच गए, लेकिन ट्रक में फंसे ड्राइवर को दो क्रेन लगाकर लगभग 3 घंटों के मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका।

पिछली बार चली गई थी ड्राइवर की जान

क्षेत्रवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये का टोल वसूलने के बावजूद फोरलेन सड़क की पेट्रोलिंग व रखरखाव में लगी कंपनी के पास आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। कुछ दिन पहले लखनादौन की मड़ई घाटी में ऐसा ही सड़क दुर्घटना के दौरान ट्रक में फंसे ड्राइवर को रेस्क्यू कर बाहर निकालने में देरी के कारण उसकी जान चली गई थी।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि संसाधनों की कमी के चलते घायल चालक घंटों तक केबिन में तड़पता रहा। एक्सीडेंट मैनेजमेंट के उचित प्रबंध नहीं होने के कारण देर रात कई घंटों तक फोरलेन में लगे जाम में फंसे वाहन चालकों, यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। नेशनल हाइवे में प्रतिदिन 8 से 10 हजार वाहनों का आवागमन होता है। वहीं आए दिन सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती हैं। एनएचएआई को आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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