छ.ग में धर्मांतरण विवाद: अजय चंद्राकर के ‘ओपन ऑफर’ से छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘आग’!

रायपुर: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मुद्दा अब केवल सामाजिक विमर्श नहीं, बल्कि एक भीषण राजनीतिक संग्राम बन चुका है. ग्राम सभाओं द्वारा धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर ने प्रदेश की सियासत में ‘आग ‘ लगा दी है.
भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने इस मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोलते हुए उन धर्म प्रचारकों को सार्वजनिक मंच पर आने की चुनौती दी है। चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा, “यदि विचार और आस्था पवित्र है, तो गुपचुप तरीके से घरों में पैठ बनाने की क्या आवश्यकता? मैं स्वयं न्योता देता हूँ, मेरे क्षेत्र में आएं और सार्वजनिक रूप से प्रचार करें.” चंद्राकर का यह ‘ओपन ऑफर’ सीधे तौर पर उन गतिविधियों पर प्रहार है, जिन्हें वे ‘सुनियोजित प्रलोभन’ मानते हैं.
भाजपा के पास विकास के नाम पर कुछ नहीं है- पूर्व विधायक विकास उपाध्याय
दूसरी ओर, कांग्रेस से पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने भाजपा की इस आक्रामकता को ‘चुनावी टूल’ करार दिया है. उपाध्याय ने पलटवार करते हुए कहा, “भाजपा के पास विकास के नाम पर कुछ नहीं है, इसलिए वह धर्म के नाम पर राजनीतिक रोटी सेंक रही है. कवर्धा से कांकेर तक जो भी सांप्रदायिक तनाव दिख रहा है, वह भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
गृहमंत्री ने बताया सांस्कृतिक जीत
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जो गांवों में धर्म प्रचारकों के प्रवेश निषेध वाले बोर्डों के खिलाफ थीं। कोर्ट ने पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं की स्वायत्तता को सर्वोपरि माना है. गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी इसे ‘सांस्कृतिक जीत’ बताया है। फिलहाल, अदालती कवच और राजनेताओं के बयानों ने बस्तर से रायपुर तक सियासी तपिश बढ़ा दी है.











