“रोहित वेमुला स्मृति कानून” लागू करने की उठी मांग, दलित-पिछड़े छात्रों ने खोला मोर्चा

यूपी के बलिया में UGC-2026 न्यू रेगुलेशन के समर्थन में उतरे सैकडों लोग. जी हां सही सुना आप ने एक तरफ जहां UGC के खिलाफ विरोध चल रहा है तो वही अब इसका समर्थन करने वाले भी सड़क उतर कर इसे लागू करने की मांग कर रहे है.
आप को बताते चले कि उच्च शिक्षा संस्थानों में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के साथ हो रहे कथित भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ स्वर मुखर होने लगे हैं. जनपद बलिया में सामाजिक संगठनों और छात्रों के एक समूह ने राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश के नाम जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर ‘रोहित वेमुला स्मृति समानता एवं संरक्षण कानून’ को अविलंब लागू करने की मांग की है.
संस्थागत जातिवाद” पर प्रहार
​ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि देश के उच्च शिक्षण संस्थान, जिन्हें सामाजिक न्याय का केंद्र होना चाहिए, वहां आज भी ‘संस्थागत जातिवाद’ (Institutional Caste Discrimination) व्याप्त है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भेदभाव केवल प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अंक देने, शोध रोकने, फेलोशिप रोकने और पदोन्नति में बाधा डालने जैसे घातक रूपों में मौजूद है.
​ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मांगें शासन के समक्ष रखी गई हैं
​नया केंद्रीय कानून: रोहित वेमुला के नाम पर एक सख्त केंद्रीय कानून बनाया जाए, जिसमें भेदभाव करने वालों के खिलाफ कठोर दंड और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था हो.
​लेटरल एंट्री पर रोक: उच्च शिक्षण संस्थानों में लेटरल एंट्री के प्रावधान को तुरंत खत्म करने की मांग.
​आरक्षण का पालन: रिक्त पड़े आरक्षित पदों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार तत्काल भरा जाए.
​छात्रवृत्ति में वृद्धि: दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और रिसर्च ग्रांट की राशि महंगाई के अनुसार बढ़ाई जाए और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित हो.
​निजीकरण पर अंकुश: शिक्षा के निजीकरण को रोकने और निजी संस्थानों में भी आरक्षण एवं सामाजिक न्याय के प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की गई है.
​”यूजीसी नियम केवल कागजी”
​ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यूजीसी के वर्तमान दिशा-निर्देश भेदभाव रोकने में विफल रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन नियमों में न तो दंड का भय है और न ही पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलने की कोई व्यवस्था, जिसके कारण रोहित वेमुला और पायल तडवी जैसी प्रतिभाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी.
​इस मांग पत्र पर शैलेश खुशिया, जनार्दन राजभर, अरविंद गोंडवाना, जयभीम भारती, राजनरायन, लक्ष्मण यादव, राघवेंद्र कुमार, अवधेश वर्मा, सतेश शाह, रेखा भारती, रमाशंकर गुप्ता और बलवंत यादव सहित कई अन्य लोगों के हस्ताक्षर मौजूद हैं.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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