शिक्षा, चिकित्सा, अर्थव्यवस्था, सनातन और स्वदेशी…विकसित भारत के लिए रामदेव ने दिलाए 5 प्रण

पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष योग गुरु स्वामी रामदेव और महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि वेलनेस, फेस-2 में ध्वजारोहण कर देशवासियों को देश के 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं. योग गुरु ने स्वदेशी शिक्षा, स्वदेशी चिकित्सा, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, स्वदेशी सनातन जीवन पद्धति और स्वदेशी से स्वावलम्बी विकसित भारत- पांच प्रण लेते हुए राष्ट्रसेवा की बात कही.
स्वामी रामदेव ने कहा कि कहीं टैरिफ टैरेरिज़्म चल रहा है, कहीं सत्ता का उन्माद, कहीं सम्पति का उन्माद और कहीं मजहबी उन्माद. वहीं भारत में सनातनधर्मियों में ही एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं. अमेरिका ने कनाडा को 100% टेरिफ की धमकी दी तो कभी भारत पर 25-50%, कभी किसी देश पर तो 500% टैरिफ की धमकी, दुनिया एक बहुत खतरनाक दौर से गुजर रही है.
स्वदेशी से विकसित भारत साकार होगा
स्वामी रामदेव ने इस दौरान स्वदेशी से विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की बात कही. उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि सब स्वदेशी का व्रत लें और मैकाले की शिक्षा का बहिष्कार करें, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का बहिष्कार करें. उन्होंने कहा कि सारी बुराइयों का और सब प्रकार के आपसी लड़ाई-झगड़ों का बहिष्कार करके हमें भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को सर्वोपरि रख करके डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए को मजबूत बनाना है.
उन्होंने कहा कि मैं वह दिन देखना चाहता हूं कि हमारा 1 रुपया 100 डॉलर के बराबर हो और वह तभी संभव है जब हम 140 करोड़ भारतीय अखंड-प्रचंड पुरुषार्थ के साथ प्रयास करें. हम सभी चाहते हैं कि हमारी वैल्यू हो, हमारे पासपोर्ट की वैल्यू हो हमारे सिटीजन की वैल्यू हो लेकिन अभी स्थिति यह है कि दुनिया के 10-15 देश को छोड़कर के दुनिया का कोई बड़ा देश हमको हमारे पासपोर्ट पर बिना वीजा के अपने यहां आने तक की अनुमति नहीं देता है.
उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान, बांग्लादेश और दुनिया के बहुत सारे देशों में बहुत विरोधी ताकतें सिर उठा रही हैं. हमें इस गणतंत्र दिवस पर स्वधर्म का संकल्प लेना है तो जो पूरे भारत को अपने दुश्मन देशों, भारत विरोधी, सनातन विरोधी ताकतों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए एक परिवार की तरह एकजुट होना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि साधु-संतों और शंकराचार्य में कोई झगड़ा न हो, न ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र के नाम पर काई उन्माद हो, न कोई जाति वर्ग के समुदाय के नाम पर उन्माद हो, न प्रांत के नाम पर किसी प्रकार का कोई प्रांतवाद का उन्माद हो, न भाषावाद का उन्माद हो, न कोई सांप्रदायिक विवाद हो. हम सब एक ऋषियों की, एक पूर्वजों की, एक वीर-वीरांगनाओं की संतान हैं, एक धरती माता, भारत माता की संतान हैं, इस संकल्प के साथ हम आगे बढ़ेंगे तो भारत पूरी दुनिया का मुकाबला कर पाएगा और हर मोर्चे पर दुनिया मेंजीत पाएगा.











