बिहार: सुपौल में नाबालिग की मांग पर सिंदूर भरना पड़ा महंगा, 2 को नौ वर्ष का कठोर कारावास

सुपौल: नाबालिग के अपहरण के एक मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. इस मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम सह विशेष न्यायाधीश पाक्सो संतोष कुमार दुबे की कोर्ट ने दो अभियुक्त को दोषी करार करते हुए 9 वर्ष कठोर कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है.
बता दें मामला लौकहा थाना कांड संख्या 24 /2024 तथा पाक्सो वाद संख्या 67./2024 से संबंधित है. इसमें लौकहा थाना क्षेत्र के एक नाबालिग का अपहरण कर जबरदस्ती उसके मांग में सिंदूर भरकर शादी कर ली. जब नाबालिग उनके चंगुल से छूटा तो पहले उन्होंने कोर्ट में नालसी दर्ज की फिर कोर्ट के आदेश पर थाना में मामला दर्ज किया गया.
दर्ज मामले में पीड़िता ने कहा था कि 4 मार्च 2024 को वह अपने घर पर अकेली थी. घर के सभी सदस्य एक शादी समारोह में गए हुए थे. रात्रि करीब 8 बजे थाना क्षेत्र निवासी अनिल कुमार उनके घर आया और कहा कि उन्हें उनकी मम्मी बुला रही है. उनके कहने पर जब वह अपनी मां के पास जाने लगी तो रास्ते में पिपरा थाना क्षेत्र के पथरा वार्ड नंबर 2 निवासी शशि शर्मा मोटरसाइकिल लेकर खड़ा था. अनिल ने हथियार का भय दिखाकर उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठा लिया और वह शशि के घर पथरा ले आया. यहां उसने जबरन उसके मांग में सिंदूर भरकर उससे शादी कर ली.
9 वर्ष का कठोर कारावास तथा 25000 रुपये अर्थ दंड की सजा
9 मार्च को मौका देख वह अपने घर वापस आई. सुनवाई उपरांत उक्त कोर्ट ने अनिल कुमार और शशि शर्मा को दोषी करार करते हुए भादवि की धारा 366 एवं 366 ए के तहत 9 वर्ष का कठोर कारावास तथा 25000 रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है. अर्थ दंड की राशि नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास तथा भादवि की धारा 363 के तहत 7 वर्ष कठोर कारावास व 25000रुपये अर्थ दंड की सजा, अर्थ दंड की राशि नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतनी होगी.
कोर्ट ने पीड़िता को एक लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का भी आदेश दिया
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अभियुक्तों द्वारा पूर्व में कारा में बिताई गई अवधि दी गई सजा में समायोजित की जाएगी. अपने फैसले में कोर्ट ने पीड़िता को एक लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का भी आदेश दिया है. अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विशेष लोक अभियोजक नीलम कुमारी ने बताया कि इस पूरे मामले में कुल 12 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था. कोर्ट ने प्राथमिकी अभियुक्त बनाए गए अशोक शर्मा ,लक्ष्मी कुमारी, ननकी देवी और कंचन देवी को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया है. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रवीण मेहता ने बहस में हिस्सा लिया.











