सोलर क्रांति की ओर भारत: 10 साल में क्षमता 4 गुना बढ़ने का अनुमान, कोयले पर निर्भरता घटेगी

देश के पावर सेक्टर में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले 10 वर्षों में भारत की सोलर पावर क्षमता चार गुना तक बढ़ सकती है, जबकि पवन ऊर्जा क्षमता में भी तीन गुना तक इजाफा होने की संभावना है। इस बदलाव के चलते बिजली उत्पादन में कोयले पर निर्भरता में बड़ी कमी आने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है, जो 2035-36 तक घटकर करीब 49 प्रतिशत रह सकती है। वहीं गैर-फॉसिल फ्यूल से बनने वाली कुल बिजली क्षमता 786 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें सोलर ऊर्जा का योगदान सबसे अधिक होगा।
ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए स्टोरेज सिस्टम पर भी जोर दिया जा रहा है। पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर की क्षमता में भारी बढ़ोतरी की योजना है, जो 13 गुना तक बढ़ सकती है। इसके साथ ही बैटरी स्टोरेज क्षमता भी मौजूदा स्तर से बढ़कर 80 गीगावॉट तक पहुंचने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि परमाणु ऊर्जा क्षमता तीन गुना बढ़कर 22 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, जबकि बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं की क्षमता में भी लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाएगा और लंबे समय में बिजली उत्पादन को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाएगा।











