भारत में तेजी से बढ़ रहा है ‘जेलीफिश पेरेंटिंग’ का ट्रेंड, जानें फायदे और फॉलो करने का सही तरीका

बदलते समय के साथ बच्चों की परवरिश करने के तरीके में भी कई तरह के बदलाव आए। पेरेंट्स ने बच्चों को डिसिप्लिन में रखने के लिए हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग से लेकर रिवर्स पेरेंटिंग तक के कई वायरल ट्रेंड को जमकर फॉलो किया। आजकल एक और पेरेंटिंग ट्रेंड पेरेंट्स के बीच काफी ट्रेंड में है, जिसका नाम ‘जेलीफिश पेरेंटिंग’ है। यह पेरेंटिंग स्टाइल खासतौर पर उन पेरेंट्स को ज्यादा पसंद आ रहा है, जो अपने बच्चों को पूरी स्वतंत्रता देने में विश्वास रखते हैं और जो यह मानते हैं कि ऐसी पेरेंटिंग बच्चे की पर्सनैलिटी और बिहेवियर के लिए जरूरी है। आइए जानते हैं आखिर क्या है ‘जेलीफिश पेरेंटिंग’, इसके फायदे और फॉलो करने का सही तरीका।
क्या है ‘जेलीफिश पेरेंटिंग’
दरअसल, समुद्री जीव जेलीफिश की एडॉप्टबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी के कारण इस पेरेंटिंग स्टाइल को जेलीफिश पेरेंटिंग कहा जाता है। जेलीफिश पेरेंटिंग करने वाले पेरेंट्स अपने बच्चों को सिर्फ अच्छे-बुरे का फर्क समझाते हैं। ऐसा करते समय वो उन्हें अपनी गलतियों और अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ने की आजादी भी देते हैं। पेरेंटिंग के इस मॉडर्न तरीके को फॉलो करने से बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ सकता है, जिससे उसे दुनिया की कठिनाइयों को समझते हुए जिम्मेदार व्यक्ति बनने में मदद मिल सकती है। आसान शब्दों में समझे तो जेलीफिश पेरेंटिंग का मतलब ऐसी परवरिश से होता है, जिसमें माता-पिता बच्चों को हर चीज के लिए खुली छूट दे देते हैं। ऐसे पेरेंट्स स्वभाव से बहुत नरम मिजाज होते हैं, जो बच्चों के हर फैसले को बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लेते हैं।
जेलीफिश पेरेंटिंग के फायदे
-जेलीफिश पेरेंटिंग में अनुशासन की जगह समझ, सजा की जगह संवाद, और नियंत्रण की जगह स्वतंत्रता को ज्यादा महत्व दिया जाता है। जिससे बच्चों को जीवन से जुड़े बड़े-छोटे फैसले खुद लेने की समझ आती है।
-जेलीफिश पेरेंटिंग के दौरान माता-पिता बच्चों की पसंद और रुचियों का सम्मान करते हुए उन्हें अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए मोटिवेट करते हैं। जिससे उनका अपने पेरेंट्स के साथ बॉन्ड मजबूत बनता है और वो खुलकर अपनी बातें पेरेंट्स से शेयर कर पाते हैं। इस तरह की पेरेंटिंग से बच्चे का गलत रास्ते पर जाने का खतरा कम हो जाता है।
-इस पेरेंटिंग स्टाइल का मकसद सिर्फ इतना है कि पेरेंट्स बच्चों की इच्छाओं को सुनें और उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें मोटिवेट करें। जिससे बच्चों को अपने अनुभवों से सीखने का मौका मिलता है और उसका कॉन्फिडेंस और क्रिएटिविटी बढ़ जाती है।
जेलीफिश पेरेंटिंग फॉलो करने का सही तरीका
जेलीफिश पेरेंटिंग का मतलब यह नहीं कि आप सब कुछ बच्चे पर ही छोड़ दें या उस पर बिना नजर रखें हर सही-गलत चीज करने की आजादी दें। इस पेरेंटिंग स्टाइल को फॉलो करने वाले पेरेंट्स को बच्चे को सही-गलत के बीच का फर्क समझाना भी बेहद जरूरी है। जिसके लिए उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना है कि बच्चे से बात करें ना कि उसे आदेश दें। बच्चों को कोई भी निर्देश देते समय उससे जरूर पूछें कि तुम्हें क्या लगता है या तुम्हारी राय क्या है? आपके ऐसा करने से वह विचारशील बनेगा। इसके अलावा पेरेंट्स को इस बात का भी खास ख्याल रखना चाहिए है कि बच्चे के लिए हमेशा सीमाएं तय करें कोई सजा नहीं। बच्चे को बताएं कि कुछ चीजें जरूरी क्यों हैं। जैसे सोने का समय, पढ़ाई का समय, खेलने का समय आदि। लेकिन ऐसा करते हुए धैर्य से काम लें।










