कुरूद की ‘जंगी सभा’ पर लगा ब्रेक: राहुल का ‘पावर शो’ फुस्स या बड़े धमाके की तैयारी?

कुरुद : छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में जिस ‘जंगी सभा’ के शोर से पारा चढ़ा हुआ था, उस पर फिलहाल बर्फ जम गई है! कुरूद विधानसभा में होने वाली कांग्रेस की बहुप्रचारित “मनरेगा बचाओ संग्राम” रैली को ऐन वक्त पर टाल दिया गया है.जो कार्यकर्ता झंडे-डंडे लेकर 25 मार्च का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अब ‘अप्रैल फूल’ नहीं, बल्कि ‘अप्रैल की तपिश’ का इंतजार करना होगा.
क्यों थमा कांग्रेस का रथ? (टाइट शेड्यूल या कुछ और?)
- कहा जा रहा है कि दिल्ली के सूरमाओं का ‘कैलेंडर’ कुरूद के ‘ग्राउंड’ से मैच नहीं कर पाया। इसके पीछे तीन बड़े रोड़े बताए जा रहे हैं:
- पांच राज्यों का चुनावी दंगल: कांग्रेस के चाणक्य वहां पसीना बहा रहे हैं.
- संसद की गरमागरम बहस: बजट और बिलों के चक्कर में दिल्ली छोड़ना मुश्किल है.
- मिडिल ईस्ट का तनाव: ग्लोबल टेंशन ने लोकल रैली की डेट बिगाड़ दी।
- चर्चा तो यह भी है कि जब तक “बड़े साहब” (राहुल गांधी) की हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक छत्तीसगढ़ कांग्रेस सिर्फ ‘निरीक्षण’ से ही काम चलाएगी.
मनरेगा: कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक या सिर्फ चुनावी दांव?
कांग्रेस इस रैली के जरिए केंद्र की मोदी सरकार की घेराबंदी करने वाली थी.आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा का हुलिया बिगाड़ रही है और बजट काटकर ग्रामीणों की थाली से रोटी छीन रही है। कुरूद को इसलिए चुना गया क्योंकि यह किसानी राजनीति का एपिक सेंटर है। यहाँ मनरेगा सिर्फ स्कीम नहीं, बल्कि हज़ारों चूल्हों की लाइफलाइन है.
निरीक्षण हुआ, जोश भरा, फिर लग गया ‘वेटिंग टिकट’:
फरवरी में जब प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कुरूद की धूल छानी थी, तब लगा था कि मार्च के अंतिम सप्ताह में सियासी सुनामी आएगी। कार्यकर्ताओं ने तो स्वागत के होर्डिंग्स तक का मन बना लिया था। लेकिन अब जिला के कांग्रेस नेताओं को सफाई देनी पड़ रही है कि “साहब लोग बिजी हैं.”
विपक्ष की चुटकी: “ये तो बस ट्रेलर है!”
इधर रैली टली, उधर विरोधियों ने चुटकी लेना शुरू कर दिया है.राजनीतिक पंडित पूछ रहे हैं— क्या यह वाकई व्यस्तता है या फिर कुरूद की जमीन पर अभी कांग्रेस की फसल तैयार नहीं हुई है? अब सबकी नज़रें अप्रैल के कैलेंडर पर हैं.क्या अप्रैल में राहुल गांधी का हेलिकॉप्टर कुरूद के खेतों में उतरेगा? या फिर तारीखों का यह खेल अभी और चलेगा?
फिरहाल कुरूद की सियासत अब ‘ठंडे बस्ते’ में है, लेकिन याद रहे… छत्तीसगढ़ की गर्मी और यहां की राजनीति, दोनों ही अचानक उबाल मारने के लिए मशहूर हैं!









