बिहार: औरंगाबाद के लाल ने असम विधानसभा का किया डिजिटाइजेशन, क्षेत्र में हर्ष का माहौल

औरंगाबाद: जिले के कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र के चिरैयांटांड़ गांव निवासी राजकुमार सिंह के पुत्र सुमन शेखर ने असम विधानसभा का डिजिटलीकरण कर जिले के सम्मान में एक अध्याय जोड़ा है. सुमन शेखर ने एआई और मशीन लर्निंग जैसे कई आधुनिक तकनीकों से लैस अलिसा (असम के लेजिस्लेटिव इंटेलिजेंस सिस्टम के लिए एआई) नामक एप्लिकेशन तैयार किया जिससे असम विधानसभा भारत का पहला डिजिटल विधानसभा बन गया है.
आपको बता दें इसमें असम विधानसभा के गठन (1937) से आज तक के सारे दस्तावेज और विधानसभा की कार्यवाहियों को मिनटों में प्राप्त किया जा सकता है. बीते सोमवार को असम प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा व विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने संयुक्त रूप से विधानसभा में इस एप्लीकेशन का अनावरण किया. इस अवसर पर राज्य के कई मंत्री और विधायक उपस्थित थे.
सुमन का यह आइडिया मुझे अद्भुत लगा था इसलिए हमने इसे बनाने की मंजूरी दी थी- विधानसभा अध्यक्ष
मुख्यमंत्री ने इस सिस्टम को डिजिटल क्रांतिकारी कदम बताते हुए सुमन और उसकी पूरी टीम को बधाई दी. विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने कहा कि जो पुराने दस्तावेजों को ढूंढने में महीनों लग जाते थे. अब वह चुटकियों में मिल जाएगा. उन्होंने बताया कि सुमन का यह आइडिया मुझे अद्भुत लगा था इसलिए हमने इसे बनाने की मंजूरी दी थी. यह एप्लीकेशन हिंदी, अंग्रेजी, आसामी और बोडो भाषा में उपलब्ध है. यह इतना सरल है कि कोई भी व्यक्ति इसका इस्तेमाल कर सकता है.
पर्यावरण से रहा है विशेष लगाव –
सुमन शेखर का जन्म मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा अम्बा तथा औरंगाबाद के सिन्हा कॉलेज में हुई. उन्होंने राजस्थान के जयपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बचपन से ही कुछ अलग करने का चाह थी, इसलिए गुरुग्राम में अभास्त्रा फाउंडेशन की नींव डाली. अपने फाउंडेशन के माध्यम से स्कूल, कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, लॉजिस्टिक, रेलवे प्रोजेक्ट के अलावा राजनीति में तकनीकी उपयोग पर भी कई काम किए.
अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों को दिया
उल्लेखनीय है कि सुमन को प्रकृति से बेहद प्यार है. उन्होंने अपने गांव में पक्षियों के लिए लकड़ी निर्मित सैकड़ों घोंसले बनवाकर रखे हैं. विश्व पर्यावरण दिवस पर विगत कई वर्षो से पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करते आ रहे हैं. इस दौरान वे आसपास के क्षेत्र में पौधों तथा चिड़ियों का घोंसला वितरण करतें है. उन्होंने अपने आसपास के क्षेत्र में सैकड़ो पीपल का वृक्ष लगाया है. सुमन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों को दिया है.











