फ्यूल स्टेशनों पर लंबी कतारें : प्रशासन ने कहा- पैनिक खरीदारी से बढ़ी भीड़, स्टॉक पर्याप्त

देशभर में पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सुबह से ही कई फ्यूल स्टेशनों पर गाड़ियों की 100 मीटर तक लंबी कतारें देखने को मिल रही है।

प्रशासन का दावा है कि अफवाहों के चलते लोग सामान्य से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं, जिससे शहर में अचानक भीड़ बढ़ गई है। जहां पहले लोग जरूरत के हिसाब से ईंधन लेते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में वाहन चालक फुल टैंक करवा रहे हैं।

वहीं, स्थिति को देखते हुए गुरुवार को रायपुर कलेक्टर ने पेट्रोल पंप एसोसिएशन और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें अधिकारियों ने साफ कहा कि पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसी तरह की कमी नहीं है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और घबराकर अतिरिक्त ईंधन न खरीदें।

कलेक्टर ने 24 घंटे पेट्रोल सप्लाई के दिए निर्देश

कलेक्टर ने सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिपो से 24 घंटे पेट्रोल सप्लाई करने के निर्देश दिए हैं। पहले टैंकरों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ही एंट्री मिलती थी, लेकिन अब लगातार सप्लाई जारी रखने का फैसला लिया गया है, ताकि पंपों पर दबाव कम हो सके।

दूसरी ओर कई लोगों का कहना है कि शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिल रहा है, इसलिए वे लाइन में लगने को मजबूर हैं।

अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…

डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए:

मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।

खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।

बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

पड़ोसी देशों में बढ़े दाम, भारत में अब हुआ इजाफा

सरकार अब तक यह तर्क देती रही थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया।

2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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