नक्सल पीड़ित परिवारों का सरकार के खिलाफ मोर्चा, नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

डोंगरगढ़ और आसपास के नक्सल प्रभावित इलाकों के पीड़ित परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है. नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों का कहना है कि वर्षों से नौकरी, मुआवजा और पुनर्वास की मांग करने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिला है. पीड़ित परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि 21 मई तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे राजनांदगांव स्थित आईजी कार्यालय के सामने परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे.
सरकारी वादों पर उठाए सवाल
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि नक्सलियों ने उनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी, लेकिन इसके बाद सरकार की ओर से घोषित सहायता योजनाएं जमीन पर नहीं उतर सकीं. परिवारों का कहना है कि प्रशासन ने नौकरी, आर्थिक सहायता, जमीन और बच्चों की पढ़ाई के लिए मदद का भरोसा दिया था, लेकिन अधिकांश लोगों को अब तक कोई लाभ नहीं मिला.
परिवारों ने बताया कि वे कई वर्षों से कलेक्टर, एसपी और अन्य अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला. उनका कहना है कि पिछले साल भी प्रशासन को आवेदन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया.
पुनर्वास नीति के अमल पर नाराजगी
नक्सल पीड़ितों ने सरकार की पुनर्वास नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि घोषणाएं तो बड़ी-बड़ी की गईं, लेकिन प्रभावित परिवार आज भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. कई परिवार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है.
पीड़ितों का कहना है कि जिन परिवारों के कमाने वाले सदस्य नक्सली हिंसा में मारे गए, उनके पास अब स्थायी आय का कोई साधन नहीं बचा है. ऐसे में सरकारी सहायता और पुनर्वास उनके लिए बेहद जरूरी है.
21 मई के बाद आंदोलन की चेतावनी
पीड़ित परिवारों ने साफ कर दिया है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं सुनेंगे. उनका कहना है कि यदि 21 मई तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आईजी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे.
परिवारों के इस ऐलान के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है. माना जा रहा है कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर नक्सल प्रभावित परिवार एकजुट होकर आंदोलन करने जा रहे हैं, जिससे सरकार की पुनर्वास नीति और उसके क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं.









