सिटी बसों में सुरक्षा इंतजाम नदारद, बिना अग्निशामक यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स दौड़ रहीं बसें

राजधानी रायपुर में सिटी बसों से सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में वीआईपी चौक के पास चलती बस में आग लगने की घटना के बाद सामने आया है कि कई बसें बिना अग्निशामक यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के सड़कों पर दौड़ रही हैं। कई बसों की हालत जर्जर हो चुकी है, बावजूद इसके उनका संचालन जारी है।
जांच में सामने आई कई बड़ी लापरवाहियां
शहर के अलग-अलग रूटों पर चल रही बसों की पड़ताल में कई खामियां सामने आईं। रेलवे स्टेशन से मंदिर हसौद जाने वाली बस में हैंडब्रेक खराब मिला, जिसके कारण बस को रोकने के लिए चक्कों के आगे पत्थर लगाना पड़ा। बस के अंदर सीटें टूटी हुई थीं और कई खिड़कियां ठीक से बंद नहीं हो रही थीं। गर्मी के बीच यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
धरसींवा रूट पर चल रही एक अन्य बस में सीट कवर फटे मिले और सीटें हिल रही थीं। बस की मुख्य हेडलाइट खराब होने के कारण अतिरिक्त लाइट लगाई गई थी। इन बसों में भी अग्निशामक यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स नहीं पाए गए। यात्रियों ने बताया कि खराब खिड़कियों और सफाई व्यवस्था के कारण सफर करना मुश्किल हो गया है।
संचालन व्यवस्था पर उठे सवाल
सिटी बस सेवा का संचालन निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। बसों के रखरखाव, बीमा और कर्मचारियों के वेतन की जिम्मेदारी कंपनी पर है, लेकिन इसके बावजूद बसों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। रायपुर में कभी 300 से ज्यादा सिटी बसें संचालित होती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर करीब 20 रह गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार बिना फिटनेस सर्टिफिकेट, अग्निशामक यंत्र और फर्स्ट एड बॉक्स के वाहन चलाना नियमों का उल्लंघन है। साथ ही बसों में ब्रेक सिस्टम, लाइट, जीपीएस और पैनिक बटन का सही हालत में होना अनिवार्य है।
नगर निगम ने जांच के दिए निर्देश
नगर निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों में सिटी बसों में आग लगने और तकनीकी खराबी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।










