अरावली पर RSS प्रमुख बोले-संतुलित विकल्प तलाशना होगा:रायपुर में धर्मांतरण-मतांतरण पर कहा- अपनों का साथ नहीं मिल रहा, अकेलेपन के चलते नशे में यूथ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं। बुधवार को उन्होंने रायपुर के एम्स ऑडिटोरियम में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम हिस्सा लिया। उन्होंने अरावली पर्वत को लेकर कहा कि अब तक दुनिया ऐसा विकास मॉडल नहीं खोज पाई है। जिसमें पर्यावरण और विकास साथ-साथ चल सकें।

उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण दोनों का समानांतर विकास हो, ऐसा संतुलित विकल्प तलाशना होगा। धर्मांतरण और मतांतरण को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि हमें उनके पास जाना चाहिए। सम्मान और प्रेम देना चाहिए। जिसके अभाव में धर्मांतरण और समानता अंतरण हो रहा है।

हमें कुछ ऐसा करना चाहिए कि वह पिछड़ापन से आगे बढ़ सकें। ऐसे में उन्हें विश्वास हो जाएगा कि हमारे लोग हमारे साथ खड़े हैं और वे मूल रूप में आना शुरू हो जाएंगे। लेकिन हमें उनके अंदर विश्वास जगाना होगा।

कई मंदिर निजी और सरकारी- मोहन भागवत

मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे देश में अलग-अलग संप्रदाय हैं और अलग-अलग लोग हैं। कई मंदिर निजी हैं और कई मंदिर सरकारी हैं। दोनों में अव्यवस्थाएं हैं। अब लोगों के ध्यान में आ रहा है कि मंदिर अपने अधीन लेना है।

उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए और याचिका लगाइए। मंदिर जिनका है, उनके ही अधीन होना चाहिए। इस पर काम चल रहा है। सवाल यह भी है कि इन चीजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट कौन जाए। इस पर भी काम किया जा रहा है।

कम्युनिज्म पर सोशल मीडिया में वैचारिक सक्रियता की जरूरत

कम्युनिज्म पर उन्होंने कहा कि कहा हमारे लोगों को सोशल मीडिया में एक्टिव होना पड़ेगा। तर्क के साथ जवाब देना होगा और अपने जवाब, विचार को लेकर अडिग होना पड़ेगा।

विविधता में एकता का विचार

मोहन भागवत ने हिंदुत्व पर कहा कि हिंदुत्व कहता है कि दिखने में अलग होने से एकता का भंग नहीं होता। सामान दिखाना एकता के लिए आवश्यक नहीं है। सदियों से युगों से एक राष्ट्र जीवन चलते आया है हिंदू राष्ट्र जीवन, वह हम सभी को जोड़ता है।

युवाओं में बढ़ती अकेलापन और नशे की समस्या

युवाओं और बढ़ते नशे पर ने उन्होंने कहा कि आज यूथ लोनली फील कर रहा है। फैमिली से संवाद कम हो गया है। फैमिली न्यूट्रल हो रही है। बातचीत की कमी के चलते युवाओं के सामने विकल्प के रूप में मोबाइल और नशा सामने आ रहा है।

1 जनवरी को सामाजिक सद्भावना बैठक

नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को राम मंदिर परिसर में सामाजिक सद्भावना बैठक आयोजित की जाएगी। सुबह 9 से 12 बजे तक चलने वाली इस बैठक में समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में सामाजिक समरसता और समकालीन विषयों पर चर्चा की जाएगी।

इस बैठक में सभी समाज और समुदायों के प्रमुख, सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी वर्ग, को आमंत्रित किया गया है। बैठक में सामाजिक सौहार्द, आपसी सहयोग और समरसता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। संघ इसे समाज में बढ़ते वैचारिक विभाजन के बीच संवाद और संतुलन की पहल के रूप में देख रहा है।

क्यों अहम है यह दौरा ?

यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रहा है, जिसमें संघ देशभर में बड़े सामाजिक आयोजनों पर जोर दे रहा है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी और युवा आबादी बड़ी है, ऐसे में संघ का युवाओं से सीधा संवाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिंदू सम्मेलन के जरिए संघ सामाजिक एकजुटता के साथ अपनी वैचारिक पहुंच को मजबूत करना चाहता है। राजनीतिक रूप से भी राज्य में बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच संघ की सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मोहन भागवत का यह तीन दिवसीय दौरा केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा, समाज और संस्कृति को केंद्र में रखकर संघ की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है। आने वाले महीनों में इसका असर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में भी दिख सकता है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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