स्ट्रेचर पर तड़पते मरीज, बीच में फर्राटा भरती बाइक—ये है इटावा अस्पताल!

इटावा:-  डॉ. भीमराव अंबेडकर जिला सरकारी अस्पताल की स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक होती जा रही है.जिस अस्पताल को आम जनता के लिए जीवन रक्षक माना जाता है, वहां आज मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं बची है.हाल ही में सामने आई घटना ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही को पूरी तरह उजागर कर दिया है.

अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड, जहां हर पल जिंदगी और मौत के बीच जंग चलती है, वहां खुलेआम मोटरसाइकिल दौड़ती नजर आई. तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि एक युवक बेधड़क बाइक लेकर इमरजेंसी वार्ड के अंदर घुसता है और बिना किसी रोक-टोक के वार्ड से निकलकर बाहर चला जाता है.यह दृश्य किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था पर सीधा तमाचा है.

सबसे गंभीर सवाल यह है कि आखिर इमरजेंसी वार्ड में इस तरह की आवाजाही की अनुमति किसने दी? न कोई सुरक्षा गार्ड, न कोई कर्मचारी और न ही कोई अधिकारी मौके पर मौजूद दिखा.ऐसा लगता है मानो अस्पताल पूरी तरह लावारिस हो चुका है.मरीज स्ट्रेचर पर पड़े हैं, परिजन परेशान खड़े हैं और उसी बीच बाइक फर्राटा भर रही है.

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधी-सीधी आपराधिक उदासीनता है.अगर बाइक से किसी मरीज को टक्कर लग जाती, किसी बुजुर्ग या बच्चे को चोट आ जाती, या किसी गंभीर मरीज के इलाज में देर हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या तब भी अधिकारी यही कहते कि “जांच कराई जाएगी”?
यह घटना स्वास्थ्य विभाग के खोखले दावों की सच्चाई बयां करती है.

कागजों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत दिखाई जाती है, लेकिन हकीकत में इमरजेंसी वार्ड तक सुरक्षित नहीं है.अस्पताल प्रशासन की यह लापरवाही बताती है कि मरीजों की जान उनके लिए कोई मायने नहीं रखती.
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में भारी रोष है.

उनका साफ कहना है कि जब इमरजेंसी वार्ड में भी कानून-व्यवस्था कायम नहीं रह सकती, तो आम मरीज किस भरोसे अस्पताल आए? अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, वरना किसी दिन यह लापरवाही किसी बड़ी और जानलेवा घटना का कारण बन सकती है.सवाल साफ है—क्या प्रशासन किसी हादसे के बाद ही जागेगा?

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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