मुंबई में सफेद पट्टी विवाद पर समाधान की पहल, राज ठाकरे ने जैन समाज से कहा- विवाद बढ़ाने वाले कदम न उठाएं

मुंबई के कई इलाकों में सड़कों पर जैन धर्मगुरुओं के लिए बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर मनसे और जैन समुदाय के बीच विवाद बेहद गहरा गया था। घाटकोपर, दादर, गिरगांव और चर्नी रोड में जैन समुदाय की ओर से बनाई गई सफेद पट्टियों पर मनसे ने कड़ा विरोध जताया है।

सड़कों पर सफेद पट्टी विवाद के बीच मालाड पूर्व के जैन समाज के संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे से उनके शिवाजी पार्क स्थित आवास ‘शिवतीर्थ’ पर मुलाकात की। राज ठाकरे ने जैन समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में स्पष्ट रूप से कहा कि अगर आपकी सोसायटी में कोई आता है तो उसका स्वागत कीजिए, लेकिन सफेद पट्टियां बनाकर आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं?

इससे बेवजह विवाद खड़े हो रहे हैं। आप उनके लिए कारपेट बिछाएं, हमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन सार्वजनिक जगह पर ऐसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ठाकरे ने सड़कों पर बनाई जा रही सफेद पट्टी विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया।

ठाकरे ने स्पष्ट किया कि जैन समाज अहिंसक और शांतिप्रिय है, लेकिन कुछ लोग व मुनि अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को गलत दिशा दे रहे हैं। उन्होंने समुदाय को सलाह दी कि वे राजनीतिक दलों के बहकावे में आकर स्थानीय लोगों के साथ बेवजह टकराव न मोल लें। इस तरह की घटनाओं से मराठी और जैन समाज के बीच अनावश्यक तनाव पैदा हो रहा है। ऐसे विवाद तुरंत बंद होने चाहिए और मराठी अस्मिता का सम्मान हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए।

दो गुजराती शीर्ष पर बैठे हैं, तो हम कुछ भी करेंगे
जैन प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि पिछले 10-12 सालों में ये सब कैसे शुरू हुआ? आपको क्या लगता है, अगर दो गुजराती शीर्ष पर बैठे हैं, तो हम कुछ करेंगे? एक कपड़ा ओढ़िए और उस पर सफेद धारियां लगाइए।

दूसरों की समस्याओं को समझिए, आप लोग व्यापारी हैं, व्यापार कीजिए और शांति से जीवन बिताएं। क्या अभी तक किसी ने आपको रोका है? जैन पंत मेरे घर आए और चले गए। अपनी जाति के लोगों को समझाइए। आज तक महाराष्ट्र में क्या जैन समुदाय को कभी किसी ने परेशान किया है।

मालाड इलाके के जिरे टोप विवाद पर मांगी माफी

मालाड इलाके में कुछ दिन पहले छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के जिरे टोप (पगड़ी) पर जैन समाज का झंडा लगाए जाने के चलते बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम को लेकर खेद जताया और लिखित माफीनामा दिया।

जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समाज या छत्रपति शिवाजी महाराज की गरिमा को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न होने देने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का भरोसा भी दिया। मुलाकात के दौरान राज ठाकरे ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में आकर समाज के बीच विवाद पैदा नहीं होने देना चाहिए।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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