सुपौल : डीएम सावन कुमार का बड़ा एक्शन, 45 निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने के निर्देश

सुपौल : जिलाधिकारी की अध्यक्षता एवं उप विकास आयुक्त की उपस्थिति में शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक की गई. जिसमें निजी विद्यालय में नामांकन, निजी विद्यालय की प्रस्वीकृति एवं नवीनीकरण, विद्यालय को विभिन्न मद में दी गई राशि के व्यय, शिक्षा विभाग के नशामुक्ति, गर्ल्स एडोलेसेंट (माहवारी की जानकारी) कस्तूरबा विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति, छात्रावास में हो रहे असैनिक निर्माण कार्य, आंगनबाड़ी विद्यालय में बाल मेला, ट्यूनिंग आफ स्कूल, असैनिक निर्माण कार्य इत्यादि की समीक्षा की गई.
कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में नामांकन की तुलना में कम उपस्थिति के लिए विशेष अभियान चलाने का निदेश दिया गया. शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सभी रिक्त सीट को भरने का निदेश दिया गया. कस्तूरबा छात्रावास में मरम्मत कार्य की समीक्षा की गई. जिलाधिकारी द्वारा निदेश दिया गया कि अविलंब गुणवत्तापूर्ण कार्य करवाते हुए राशि का सदुपयोग किया जाय. कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में व्यय 72.5 प्रतिशत है.
सुपौल, राघोपुर का व्यय कम है इस पर चिंता व्यक्त की गई तथा आवश्यक निदेश दिया गया. निजी विद्यालय द्वारा ज्ञानदीप पोर्टल पर 121 बच्चे का नामांकन नहीं लिया गया है जबकि 13 बच्चे को रिजेक्ट कर दिया गया है इस पर जिलाधिकारी द्वारा गहरी नाराजगी व्यक्त की गई. 45 निजी विद्यालय के अपनी इंटेक कैपेसिटी नहीं भरने के कारण इन सभी विद्यालय के मान्यता को रद करने का निदेश दिया गया.
190 विद्यालय को ट्यूनिंग आफ स्कूल के तहत दस हजार की राशि प्रति विद्यालय दी गई है. अब तक मात्र 68 विद्यालय के द्वारा राशि का व्यय किया गया है. जिलाधिकारी द्वारा उप विकास आयुक्त एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी को विद्यालय के व्यय का जांच करने कार्यक्रम के संबंध में बच्चों का फीडबैक लेने का निदेश दिया गया. समग्र विद्यालय अनुदान, खेल मद में दी गई राशि, सीआरसी को दी गई राशि के व्यय की स्थिति असंतोषजनक है, खेल मद में मात्र 07 प्रतिशत की निकासी की गई.
जिलाधिकारी के द्वारा सभी विद्यालय के खेल सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने का निदेश दिया गया जो भी विद्यालय अब तक व्यय नहीं किये हैं वे अविलंब गुणवत्तापूर्ण सामग्री का क्रय करेंगे. असैनिक निर्माण कार्य की समीक्षा के क्रम में डीएम के द्वारा 12 के भवन के निर्माण इसकी गुणवत्ता की समीक्षा की गई. उन्होंने विद्यालयों में लाल ईंट, फलाईऐश ईंट की गुणवत्ता को अच्छे तरीके से जांच करने, निर्माण स्थल पर पानी का छिड़काव करने, कोटा स्टोन की पालिसिंग, छत की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निदेश दिया गया.
यदि किसी निर्माण स्थल पर गैर गुणवत्तापूर्ण की सामग्री का उपयोग को देखा गया तो संबंधित संवेदक से दंडसवरूप राशि की कटौती कर दी जायेगी. जिलाधिकारी द्वारा सभी निर्माण स्थल पर बाेर्ड लगाते हुए जिले का एक संपर्क संख्या भी आमलोगों के लिए उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया.
जिससे कि कोई भी व्यक्ति गलत कार्य की शिकायत जिला से कर सके. जिलाधिकारी द्वारा समीक्षा बैठक में बच्चों के पठन-पाठन, लर्निंग आउट कम, पीपीटी नहीं रहने पर नाराजगी व्यक्त की गई तथा निदेश दिया गया कि अगले बैठक में इस विषय पर पीपीटी तैयार कर शामिल किया जाय
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