ट्रंप-नेतन्याहू मुलाकात के बाद ईरान पर बढ़ा तनाव, तालिबान का समर्थन बयान

डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया मुलाकात के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने इजरायल को ईरान के मिसाइल कार्यक्रम के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई में समर्थन देने का संकेत दिया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान अमेरिका ने इजरायल को सैन्य सहयोग देने की बात कही, जिसमें हवाई ईंधन भरने और एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। इजरायल लंबे समय से ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता रहा है।
इस बीच तालिबान ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो वह ईरान का समर्थन करेगा। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि उनका संगठन युद्ध का समर्थन नहीं करता, लेकिन अफगानिस्तान के लोग ईरान के साथ खड़े रहेंगे और अपनी क्षमता के अनुसार मदद करेंगे।
ईरान के पास पश्चिम एशिया में मजबूत मिसाइल क्षमता है, जिसमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम आत्मरक्षा के लिए है, जबकि अमेरिका और इजरायल इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल ईरान पर हमला करता है और अमेरिका उसका समर्थन करता है, तो इससे पश्चिम एशिया में व्यापक सैन्य संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, ऐसे किसी भी संघर्ष का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है, जहां प्रमुख शक्तियों और क्षेत्रीय संगठनों के बयान और रणनीतियां भविष्य की स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।











