विष्णु के सुशासन में लौट आया खुशियों का दौर, बस्तर में समृद्धि फैल रही चहुंओर

बस्तर: छत्तीसगढ़ का बस्तर, जहां कभी गोलियों की गूंज थी. आज वहां विकास का शंखनाद है. जहां एक समय में भय और असुरक्षा का माहौल था, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आज वहां विश्वास, उम्मीद और प्रगति की रोशनी है. बस्तर नक्सलवाद की चुनौती से जूझ रहा था, आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में तेजी से शांति, सुरक्षा और समावेशी विकास की राह पर अग्रसर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के दृढ़ संकल्प को मुख्यमंत्री साय पूरे संकल्प और संवेदनशीलता के साथ धरातल पर उतार रहे हैं.

नियद नेल्ला नार एवं पूना मारगेम अभियान बना विकास की नींव

नियद नेल्ला नार योजना एवं पूना मारगेम अभियान के माध्यम से बस्तर के दुर्गम अंचलों में 59 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे 403 से अधिक गांवों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित हुई है. बीते 23 महीनों में 487 नक्सली मुठभेड़ों में न्यूट्रलाइज किए गए, 2336 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 1853 को गिरफ्तार किया गया है. यह बदलते बस्तर की मजबूत तस्वीर है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ पुनर्वास नीति लागू है, तीन वर्षों तक प्रतिमाह ₹10,000 स्टाइपेंड व भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान है.

शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को मिल रहा सीधा लाभ

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सुरक्षा के साथ-साथ विकास भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है. गांव-गांव में लगाए जा रहे विभिन्न शिविरों के माध्यम से अब तक 81,823 लोगों के आधार कार्ड, 52,271 आयुष्मान कार्ड और 58,800 हितग्राहियों का मनरेगा जॉब कार्ड बनाएं गए है. 5,885 किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ मिला, वहीं 42,181 राशन कार्डों के माध्यम से 1,24,487 हितग्राहियों को निःशुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया हैं. बस्तर के दुर्गम इलाकों में 26 बारहमासी सड़कों, 43 नए मोबाइल टावर एवं 349 टावर को 4G में अपग्रेड, 18 उचित मूल्य दुकानों, 34 उप-स्वास्थ्य केंद्रों एवं 516 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना से बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है.

बिजली और शिक्षा से रौशन हो रहा गांव

मुख्यमंत्री साय ने हर गांव को विकास के साथ बिजली से रौशन करने का संकल्प लिया और 266 गांवों में विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है और 2,000 से अधिक परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत स्वच्छ ईंधन का लाभ मिला है. शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल करते हुए आज़ादी के बाद पहली बार अबूझमाड़ के रेकावाया गांव में स्कूल का निर्माण हुआ है तथा 50 बंद स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है, जो बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही है.

युवाओं को मिल रहा रोजगार और स्वरोजगार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 90,273 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर 39,137 युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया है. बस्तर फाइटर्स बल में 3,202 पदों का सृजन कर स्थानीय युवाओं को सुरक्षा बल में भर्ती कराया गया. बस्तर ओलम्पिक में 65 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों एवं बस्तर पंडुम के माध्यम से 47 हजार से ज्यादा कलाकारों को भव्य अवसर प्रदान करने का कार्य किया गया. नई औद्योगिक नीति 2024–30 के तहत बस्तर को विशेष पैकेज प्रदान किया गया हैं. रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन के लिए 3513.11 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है. साथ ही केके रेल लाइन के दोहरीकरण का काम तेजी से चल रहा है. यूएन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रुप में बस्तर के धुड़मारास गांव को इको टूरिज्म विलेज के रुप में विकसित किया जा रहा है.

यातायात इन्फ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से बस्तर को मिलेगी नई पहचान

रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन के लिए 3513.11 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है. साथ ही केके रेल लाइन के दोहरीकरण का काम तेजी से चल रहा है. यूएन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रुप में बस्तर के धुड़मारास गांव को इको टूरिज्म विलेज के रुप में विकसित किया जा रहा है. तेंदुपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर को 400 रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 5500 रुपया किया. साथ ही पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बंद की गई चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ की गई है. जिसका लाभ 12.40 लाख परिवारों को मिल रहा हैं. नियद नेल्ला नार योजना से गांवों में अब आवागमन के लिए ग्रामीण बस सेवा भी प्रारंभ की गई है. महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को 1000 रूपये प्रतिमाह देकर आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रभावी नेतृत्व, मजबूत इच्छाशक्ति और जनकल्याणकारी सोच से बस्तर तेजी से बदल रहा है. आज बस्तर भय से नहीं विकास, संस्कृति, परंपरा और पर्यटन पहचाना जा रहा है. यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं है यह विश्वास, विकास और भविष्य की ओर बस्तर बढ़ते कदमों का प्रमाण है.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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