सुशासन सरकार में बंदूक की गोली नहीं फोन की घंटी बज रही, बस्तर-सरगुजा में डिजिटल युग का हो रहा नया सूर्योदय

छत्तीसगढ़ का बस्तर एवं सरगुजा अंचल अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक पहचान के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। लंबे समय तक यह क्षेत्र घने जंगलों, भौगोलिक कठिनाइयों, नक्सलवाद और सीमित बुनियादी सुविधाओं के कारण मुख्यधारा की डिजिटल व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी नीतियों से बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के सुदूर इलाकों में डिजिटल क्रांति का नया दौर शुरू हो चुका है। मोबाइल टावर विस्तार योजना इस परिवर्तन का आधार बन रही है, जिसके माध्यम से गांव-गांव तक मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने का अभियान तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
डिजिटल युग में कनेक्टिविटी केवल संवाद का माध्यम बस नहीं रह गया है, यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रशासन और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में विकास का आधार बन चुका है। प्रदेश के हर नागरिक को डिजिटल युग से जोड़कर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की नेतृत्व वाली सुशासन सरकार ने बस्तर सरगुजा जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में मोबाइल टावरों के बड़े पैमाने पर विस्तार का निर्णय लेकर मिशन मोड पर कार्य कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य नागरिकों को डिजिटल सेवाओं से जोड़कर उनके जीवन को आसान और समृद्ध बनाना है।

सुशासन सरकार में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली प्राथमिकता
दिसंबर 2023 में सुशासन सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विकास की प्राथमिकता में शामिल किया है। डिजिटल कनेक्टिविटी आज के समय में मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। 3 मार्च 2025 को प्रस्तुत बजट 2025-26 में “मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना” को शामिल किया गया। योजना के तहत पूरे राज्य में पांच हजार से अधिक मोबाइल टावर चरणबद्ध तरीके से स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। विश्वसनीय इंटरनेट सेवा बनाए रखने के लिए बस्तरनेट परियोजना के लिए बजट 2026-27 में 5 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इन टावरों के माध्यम से 4G नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा और भविष्य में 5G सेवाओं के लिए भी आधार तैयार किया जा रहा है। सरकार ने इसके साथ बैकहॉल कनेक्टिविटी और फाइबर नेटवर्क को मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि स्थापित टावर पूरी क्षमता से काम कर सकें।
नक्सलगढ़ो में मोबाइल टॉवर लगने से ग्रामीण है उत्साहित
सुशासन सरकार छत्तीसगढ़ के हर गांव को डिजिटल सुविधा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प से बस्तर के नक्सलगढ़ कहे जाने वाले सुकमा जिला के टेकुलगुडेम, बीजापुर जिला के गूंजेपर्ती सहित गोटूपल्ली गांव में मोबाइल टॉवर स्थापित किया है। टेकुलगुडेम में लगे टावर आसपास के टिम्मापुरम, जोनागुड़ा और कुख्यात नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती जैसे दूरस्थ गांवों को नेटवर्क सुविधा प्रदान कर रहा है। गोटूपल्ली गांव में टावर लगने से मंडीमरका, मुरदण्ड, जंगालगुड़ा और समीप के अन्य इलाकों के ग्रामीणों को भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा का लाभ मिलने लगा है।गुंजेपर्ती गांव में टॉवर लगने से पुजारी कांकेर, चिंगनपल्ली, नेल्लाकांकेर और कमलापुर जैसे दूर दराज के गांवों में लोगों को फोन की सुविधा मिलने लगी है। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामाना करना पड़ रहा था।

नए टावर लगने के साथ–साथ पुराना टावर भी हो रहे अपग्रेड
बस्तर और सरगुजा अब प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत के साथ बढ़ती डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास की नई कहानी के लिए जाना जाएगा। सुशासन सरकार ने नए टावर लगाने के साथ-साथ पुराने टावरों को भी अपग्रेड कर रहे है। पुराने 607 टावरों में से 349 का 4G में अपग्रेड किया गया है। नियद नेल्लानार योजना के तहत 112 नए टावर स्वीकृत एवं 43 टावर स्थापित हो चुके है। केंद्र सरकार ने डिजिटल भारत निधि के तहत 500 मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान की है, जिसका सबसे ज्यादा लाभ बस्तर एवं सरगुजा अंचल को मिलेगा। टावरों के स्थापित होने से नागरिक डिजिटल युग में प्रवेश करेंगे जिससे उन्हें नई ऊर्जा के साथ नई दिशा मिलेगी।
मोबाइल टावर योजना से हो रहा गांवों का विकास
बस्तर एवं सरगुजा संभाग के कई गांव ऐसे थे जहां कुछ साल पहले तक मोबाइल नेटवर्क मिलना भी मुश्किल था। लोगों को फोन करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इंटरनेट की सुविधा तो लगभग न के बराबर थी। ऐसे में सरकारी योजनाओं की जानकारी, ऑनलाइन सेवाओं का लाभ, बैंकिंग सुविधा और डिजिटल भुगतान जैसी व्यवस्थाएं वहां के लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाती थी। लेकिन अब सुशासन सरकार के मोबाइल टावर योजना के तहत इन क्षेत्रों में तेजी से टावर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की पहुंच लगातार बढ़ रही है। इस पहल का सबसे बड़ा लाभ शिक्षा क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। मोबाइल टावर विस्तार योजना छत्तीसगढ़ के विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा अंचल के लिए विकास की नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है।
त्वरित पहुंच रही सरकारी योजनाओं का लाभ एवं जानकारी
मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सरकारी योजनाओं की जानकारी भी अब तेजी से गांवों तक पहुंच रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), प्रत्यक्ष लाभअंतरण (DBT) और अन्य योजनाओं से जुड़े संदेश अब लाभार्थियों तक समय पर पहुंचने लगे हैं। ग्रामीणों को बैंकिंग लेन-देन से जुड़े एसएमएस अलर्ट और सरकारी सूचनाएं मोबाइल पर मिल रही हैं। टेलीमेडिसिन और वीडियो परामर्श जैसी सुविधाएं भी धीरे-धीरे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने लगी हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, सुरक्षा, व्यापार और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही निरंतर गति
मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी बदलाव दिख रहा है। किसान अब मोबाइल के जरिए मंडी भाव देख पा रहे हैं और अपनी फसल की बेहतर कीमत तय कर रहे है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग से ग्रामीण बाजारों में पारदर्शिता आई है। स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यापारियों ने भी ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को अपनाना शुरु किया है। अब पैसे निकालने के लिए बैंक जाना नहीं पड़ रहा है, UPI से सीधा भुगतान हो रहा है। युवाओं के लिए भी नई संभावनाएं खुल रही हैं। उन्हें ऑनलाइन शिक्षा सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी और रोजगार से जुड़ी सूचनाएं आसानी से मिल रही हैं। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेन-देन की सुविधा से व्यापार में पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
आपातकालीन सेवा 112-108 द्वारा त्वरित मदद हुआ आसान
मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से आपातकालीन सेवाओं की पहुंच भी पहले से कहीं अधिक प्रभावी हुई है। सुदूर वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में अब लोग किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 112, 108 और 102 जैसी सेवाओं से संपर्क कर पा रहे हैं। पहले जहां नेटवर्क की कमी के कारण दुर्घटना, बीमारी या अन्य संकट के समय सहायता पहुंचने में देरी हो जाती थी, वहीं अब बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी के कारण पुलिस, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सेवाओं तक तत्काल सूचना पहुंच रही है। इससे समय पर मदद मिलना संभव हुआ है साथ ही कई मामलों में लोगों की जान बचाने में भी बड़ी मदद मिल रही है। मोबाइल टावर योजना के माध्यम से सरकार का यह प्रयास ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिली है। बेहतर संचार सुविधा से सुरक्षा बलों के बीच समन्वय तेज और प्रभावी हुआ है, वहीं नक्सल मूवमेंट की त्वरित जानकारी मिलना भी संभव हो पाया है। इससे समय पर कार्रवाई में मदद मिल रही है। साथ ही ग्रामीणों और प्रशासन के बीच संवाद मजबूत हुआ है, जो नक्सलवाद के प्रभाव को कम करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।











