तालाबों की बदहाली से गहराया जल संकट, भूजल स्तर पर बढ़ा खतरा

शहर के तालाबों की लगातार बिगड़ती स्थिति अब जल संरक्षण और भूजल स्तर के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। निगम प्रशासन की अनदेखी और लोगों द्वारा प्लास्टिक कचरा फेंके जाने से अधिकांश तालाब जलकुंभी और गंदगी से पट चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे तालाबों की जल संचयन क्षमता प्रभावित हो रही है और शहर का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
तालाबों में बढ़ा प्रदूषण, भूजल रिचार्ज प्रभावित
राजधानी में 100 से अधिक छोटे-बड़े तालाब हैं, लेकिन अधिकांश तालाबों की स्थिति खराब है। कई तालाबों में प्लास्टिक कचरा, जलकुंभी और गंदे नालों का पानी जमा होने से उनका प्राकृतिक स्वरूप खत्म होता जा रहा है। तालाबों के किनारों पर सीमेंटकरण और लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर 700 से 1000 फीट से भी नीचे पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
प्रमुख तालाबों की हालत चिंताजनक
पेंठु तालाब, खोखो तालाब और राजा तालाब समेत कई प्रमुख जलाशय जलकुंभी और कचरे से पूरी तरह ढके हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से नियमित सफाई नहीं होने के कारण तालाबों से दुर्गंध आने लगी है और उनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कुछ स्थानों पर गंदे नालों का पानी सीधे तालाबों में गिरने से जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
नियमित सफाई और जनभागीदारी पर जोर
नगर निगम का कहना है कि तालाबों की नियमित सफाई की योजना बनाई जा रही है, जिसमें जनसहयोग को भी प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं जल विशेषज्ञों का मानना है कि जलकुंभी और प्लास्टिक कचरा जलीय जीवन के साथ-साथ भूजल संरक्षण के लिए भी गंभीर खतरा है। उनका कहना है कि तालाबों को प्रदूषण मुक्त बनाए बिना जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।










