छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की जोरदार शुरुआत, पहले दिन 188 केंद्रों में 18,639 क्विंटल धान की खरीद

छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का महाअभियान शुरू होते ही पहले दिन उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिली। राज्यभर के 188 खरीद केंद्रों में किसानों से कुल 18,639 क्विंटल धान की खरीदी की गई। सरकार ने इस वर्ष अभियान को अधिक सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएँ लागू की हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धान खरीदी की शुरुआत पर किसानों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि किसानों की मेहनत से ही राज्य में समृद्धि और खुशहाली का वातावरण बनता है।
इस वर्ष राज्य में कुल 2,739 धान खरीदी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें किसानों के लिए पेयजल, शेड, बैठने की व्यवस्था, माइक्रो एटीएम और तौल मशीन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवस्थित होगी। किसी भी किसान को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश दिए गए हैं। तुँहर टोकन ऐप, जीपीएस आधारित परिवहन और कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर जैसी तकनीकों को भी व्यवस्था में शामिल किया गया है।
पहले दिन विभिन्न जिलों में जनप्रतिनिधियों ने स्वयं मौजूद रहकर खरीदी की शुरुआत कराई। बिलासपुर के सेंदरी केंद्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने, जबकि कबीरधाम के महाराजपुर में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खरीदी की औपचारिक शुरुआत की। सूरजपुर में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, बलरामपुर में कृषि मंत्री रामविचार नेताम और बस्तर के पल्ली केंद्र में सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने पूजा-अर्चना कर अभियान की शुरुआत की। कांकेर के मालगांव केंद्र में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और महासमुंद में कौशल विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने धान खरीदी का शुभारंभ किया।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान सम्मानजनक वातावरण में अपना धान बेच सके और समय पर भुगतान प्राप्त करे। खरीदी केंद्रों में किसानों का स्वागत फूल-मालाओं से किया गया, जिससे पूरे राज्य में उत्साह का माहौल रहा। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में खरीदी प्रक्रिया और अधिक सुचारू रूप से चलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ धान खरीदने का अभियान नहीं, बल्कि किसान के परिश्रम का सम्मान है। सरकार का उद्देश्य है कि पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ हर किसान को उसका उचित मूल्य मिले और राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था मजबूत बने।











