वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से छत्तीसगढ़ में बारिश की चेतावनी:दो दिनों तक हो सकती है बूंदाबांदी, कोहरा छाएगा, 48 घंटे बाद फिर बढ़ेगी ठंड

छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड के बीच एक बार फिर मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर पाकिस्तान और पंजाब के ऊपर बने वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से प्रदेश के एक-दो जगहों पर बूंदाबांदी होने की संभावना है। यह बारिश का सिलसिला अगले दो दिनों तक जारी रह सकता है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में घना कोहरा छाने के भी आसार हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इसके बाद आने वाले अगले 3 दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे ठंड का असर फिर से बढ़ जाएगा।
पिछले 24 घंटों के दौरान दुर्ग संभाग के एक-दो क्षेत्रों में शीतलहर (Cold Wave) का असर देखा गया। इस दौरान प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे अधिक तापमान दुर्ग में 29.8 डिग्री सेल्सियस।
बच्चों पर पड़ रहा ठंड का असर
कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है।
नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।
NICU और SNCU तक पहुंच रहे मामले
डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।
OPD में मरीजों की भीड़
ठंड के चलते अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। रोजाना 2000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है।











