पश्चिम बंगाल में पब्लिक सेफ्टी के लिए बनेगा नया कानून, ऐसे लोग झट से होंगे गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए ‘पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ राज्य विधानसभा में पेश किया जा रहा है. अगर सबकुछ योजना के अनुसार हुआ, तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सोमवार को विधानसभा में यह बिल पेश करेंगे. उन्होंने बजट सत्र के दौरान अपने भाषण में इसकी घोषणा की थी और उसी के अनुसार, कानून विभाग ने अब एक सख्त नया कानून तैयार किया है. चूंकि मुख्यमंत्री के पास कानून विभाग का प्रभार भी है, इसलिए यह बिल उनकी सीधी देखरेख में तैयार किया गया है.
24 जून को कोलकाता गजट के एक विशेष अंक में प्रकाशित इस बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संगठित असामाजिक गतिविधियों पर मजबूत नियंत्रण स्थापित करना है. बिल के अनुसार, किसी भी ऐसे व्यक्ति या समूह के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसकी गतिविधियां जनता के बीच डर, घबराहट या असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं, सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करती हैं, जान-माल को खतरा पहुंचाती हैं या कानूनी व्यापार, व्यवसाय और पेशेवर गतिविधियों में बाधा डालती हैं. अवैध खनन, बिना अनुमति के रेत निकालना और वन संसाधनों या वन्यजीवों से जुड़ी गैर-कानूनी गतिविधियों को भी असामाजिक गतिविधियों की परिभाषा के दायरे में लाया गया है.
इस बिल के सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक ‘निवारक हिरासत’ (preventive detention) है. यदि राज्य सरकार या कोई अधिकृत अधिकारी यह मानता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियां सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं, तो उस व्यक्ति के खिलाफ हिरासत का आदेश जारी किया जा सकता है. जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस आयुक्तों को भी विशिष्ट परिस्थितियों में ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार होगा.
हिरासत में लिए गए व्यक्ति को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर हिरासत के आधार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपना पक्ष रखने या अपनी बात कहने का अवसर दिया जाना चाहिए. हालांकि, अधिकारियों के पास जनहित की रक्षा के लिए आवश्यक मानी जाने वाली जानकारी को रोकने का अधिकार होगा.
सलाहकार बोर्ड के गठन का भी प्रावधान
बिल में हिरासत के आदेशों की समीक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा एक या अधिक सलाहकार बोर्ड के गठन का भी प्रावधान है. ऐसे बोर्ड का अध्यक्ष कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जिसने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में काम किया हो. इसके अलावा, दो अन्य सदस्य होंगे जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के योग्य हों. हिरासत के आदेश से संबंधित सभी प्रासंगिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड को हिरासत के तीन सप्ताह के भीतर बोर्ड के समक्ष रखा जाना चाहिए. सलाहकार बोर्ड हिरासत के औचित्य की जांच करेगा और अपनी राय देगा. यदि बोर्ड को पर्याप्त कारण मिलता है, तो राज्य सरकार हिरासत को जारी रख सकती है. अगर बोर्ड इस नतीजे पर पहुंचता है कि हिरासत में रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हैं, तो हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तुरंत रिहा कर दिया जाना चाहिए.
सलाहकार बोर्ड की कार्यवाही आमतौर पर गोपनीय रहेगी. आमतौर पर, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के सामने वकील के जरिए अपना पक्ष रखने का अधिकार नहीं होगा. हालांकि बोर्ड खास मामलों में ऐसी अनुमति दे सकता है.
हिरासत से बचने के लिए व्यक्ति भाग जाए तो क्या?
बिल में यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति हिरासत के आदेश से बचने के लिए भाग जाता है, तो उसके खिलाफ खास कदम उठाए जा सकते हैं. प्रशासन अदालतों के जरिए घोषणाएं जारी कर सकता है, व्यक्ति की संपत्ति के संबंध में कार्रवाई कर सकता है और उस व्यक्ति को अधिकारियों के सामने पेश होने का निर्देश दे सकता है. कानून अधिकारियों को असामाजिक गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति, दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की तलाशी लेने, उन्हें जब्त करने और उन्हें अपने कब्जे में लेने का अधिकार भी देगा. राज्य सरकार या अधिकृत अधिकारी जब्त की गई संपत्ति की कस्टडी, रिहाई या निपटान के संबंध में निर्देश जारी कर सकते हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल की धारा 19 में यह प्रावधान है कि इस कानून के तहत सजा-योग्य अपराधों, साथ ही इसके तहत जारी कानूनी आदेशों के उल्लंघन को संज्ञेय (cognizable) और गैर-ज़मानती (non-bailable) अपराध माना जाएगा. इससे कानून लागू करने वाली एजेंसियों को व्यापक अधिकार मिलेंगे.
नया कानून लाना जरूरी
बिल के साथ दिए गए ‘उद्देश्यों और कारणों के बयान’ में राज्य सरकार ने कहा है कि समाज के कुछ वर्गों द्वारा की जाने वाली असामाजिक गतिविधियां आम नागरिकों की जान-माल के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं. सरकार के अनुसार, ऐसी गतिविधियों से निपटने में मौजूदा कानून अक्सर अपर्याप्त या बेअसर साबित हुए हैं, इसलिए एक नया कानून लाना जरूरी हो गया है. सरकार का मानना है कि यह बिल असामाजिक ताकतों पर लगाम लगाने, साजिश वाली और गैर-कानूनी गतिविधियों को रोकने और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा.
यह बिल अभी विधानसभा में पेश किए जाने की प्रक्रिया में है. अगर यह कानून बन जाता है, तो उम्मीद है कि यह पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नया कानूनी ढांचा साबित होगा.









