गांव की दीवारें बनीं पढ़ाई का जरिया, बच्चों को घर बैठे मिल रही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत सेलर में स्कूली बच्चों की पढ़ाई को नई दिशा देने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। गांव की दीवारों को ‘चलती-फिरती पाठशाला’ में बदल दिया गया है, जहां सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, गणित, रीजनिंग और करंट अफेयर्स से जुड़े सवाल लिखे गए हैं। बच्चे स्कूल आते-जाते इन प्रश्नों को पढ़ते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी साथ-साथ कर रहे हैं।
गांव में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को बिना कोचिंग के प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है। शहरों की तुलना में गांवों में कोचिंग और उचित मार्गदर्शन की कमी को देखते हुए जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने यह प्रयोग शुरू किया है। इसके तहत गांव की गलियों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर बहुविकल्पीय प्रश्न लिखे गए हैं, ताकि बच्चे रोजमर्रा की दिनचर्या के दौरान भी पढ़ाई से जुड़े रहें।
इस व्यवस्था के तहत दीवारों पर लिखे गए करीब 50 प्रश्न हर दो महीने में बदले जाएंगे। इस तरह एक वर्ष में लगभग 300 नए प्रश्न बच्चों तक पहुंचेंगे। समय-समय पर इन्हीं प्रश्नों के आधार पर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित व पुरस्कृत किया जाएगा।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस पहल का मकसद पढ़ाई को स्कूल की चारदीवारी तक सीमित न रखकर पूरे गांव तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि यदि बच्चों में बचपन से ही सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की आदत विकसित होगी तो भविष्य में वे बड़ी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि सुबह-शाम टहलने या स्कूल आने-जाने के दौरान बच्चे दीवारों पर लिखे प्रश्न पढ़ते हैं, जिससे उनकी जानकारी बढ़ रही है और पढ़ाई के प्रति रुचि भी विकसित हो रही है। शिक्षा के क्षेत्र में यह नवाचार अब दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है।











