सरकारी पैथोलॉजी लैब निजी हाथों में देने की तैयारी, 6 हजार तकनीशियनों के सामने बदलेगी जिम्मेदारी

राज्य के सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब को निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित करने की तैयारी के बीच करीब छह हजार मेडिकल लैब तकनीशियनों (एमएलटी) के भविष्य को लेकर नई स्थिति सामने आई है। मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में वर्षों से कार्यरत तकनीशियनों को अन्य विभागों में समायोजित करने पर विचार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तकनीशियनों के प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनसे वैकल्पिक पदों को लेकर सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित विकल्पों में आयुष्मान भारत योजना और सीजीएमएससी में कार्यालयीन कार्य, फूड एंड ड्रग विभाग में सैंपल कलेक्शन से जुड़े दायित्व तथा पंचायत विभाग में प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि जिन कर्मचारियों ने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं और तकनीकी प्रशिक्षण के बाद मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की है, उन्हें गैर-तकनीकी जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना से कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है। कई तकनीशियन पिछले 15 से 20 वर्षों से सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी इस संबंध में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों और तकनीशियन प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चाओं से संकेत मिले हैं कि सरकारी लैब सेवाओं के निजी हाथों में जाने के बाद तकनीकी स्टाफ की जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव हो सकता है।

सरकार चरणबद्ध तरीके से सरकारी पैथोलॉजी सेवाओं के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। शुरुआती चरण में चार जिला अस्पतालों में संचालित ‘हमर लैब’ को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आगामी चरणों में अन्य जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी की लैब को भी इस व्यवस्था में शामिल किए जाने की संभावना है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत तकनीशियनों को विभिन्न विभागों में समायोजित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जबकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close
Virus-free.www.avast.com